Thursday, May 9, 2019

हरियाणे में हो सकै आधम-आध




“ऊंट किस करवट बैठेगा?”


इस बार हरियाणा में यह सवाल नहीं पूछना। जो कल तक आठ-दो आठ-दो कर रहे थे। अब इस सवाल पर बगलें झांकते हैं। मगर जो अनुभवी हैं, वह उलटा सवाल पूछते हैं- ऊंट उठ्या ई कद था? ज्यों का त्यों बैठा सै। भाई एकाध पांव इधर-उधर सिकोड़ सके तो एकाधा फैला वी सके।


ताऊ होके के घूंट में उतनी राजनीति रोज धुएं में उड़ा देता है, जितनी के बल पर लोग खुद को लीडर समझते हैं। पिछले पांच साल में हरियाणा की राजनीति पूरी तरह बदल गई है। बदली तो पूरे देश की ही है मगर जहां हिंदू बनाम मुसलमान का ध्रुवीकरण नहीं चल सकता, वहां क्या चलेगा, इसकी प्रयोगशाला नेताओं ने हरियाणा को बनाया है।


35-1 यहां की राजनीति का नया कोडवर्ड है। भारतीय जनता पार्टी को लगता है कि यह मंत्र उसके लिए चमत्कारी है। इसी से 8-2 का सुर भी निकलता है, जिसे वह साधने के लिए पांच साल से लगातार रियाज कर रही है। जींद उपचुनाव में जिस तरह से भाजपा ने कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला और जननायक जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के दिग्विजय सिंह चौटाला को हराया, उसने इस फार्मूले की सफलता पर मुहर भी लगा दी। मगर भाजपा, कांग्रेस और जेजेपी ने जिस तरह से चुनावी शतरंज बिछाई है और अपने वजीर उतारे हैं, उसने 35-1 की बात को बेमानी कर दिया है। यकीन न हो तो किसी भी ताऊ से पूछ लो। वह खड़ी फसल देख के बता सकता है कि कै मन किले होगा। ताऊ की बात खरी है- भाई ब्यौंत तो पूरा था। फसल ठाडी ऐ ना थी। पर हवा मार गई। इब तो आधम-आध हो सकै सै।


35-1 वाले क्या यह बता सकते हैं कि भिवानी-महेंद्रगढ़ में यह फार्मूला कैसे चलेगा। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने यहां से जाट उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। वही पिछली बार वाले। भाजपा के मौजूदा सांसद धरमबीर दो साल से तो चुनाव लड़ने की अनिच्छा जता रहे थे। पार्टी ने टिकट दिया है तो प्रचार पर जाते हैं, मगर महेंद्रगढ़ के ज्यादातर गांवों में तो इसबार लोग उन्हें देखने के लिए भी नहीं जुटते। उनका सहारा मोदी लहर है, पिछली बार की तरह इस बार भी उठी तो तर जाएंगे, नहीं तो डूबने का कोई गम नहीं। उनका मुकाबला कांग्रेस की श्रुति चौधरी से है। जो पिछले चुनाव में तीसरे स्थान पर रही थीं मगर तब दूसरे स्थान पर रहे राव बहादुर सिंह अब कांग्रेस में शामिल हैं। इस बार स्थिति बदली हुई है। वह हरियाणा का विकास पुरुष कहे जाते बंसीलाल की पोती हैं और उनके लिए उनकी मां तथा हुड्डा सरकार में मंत्री रहीं किरण चौधरी ज्यादा मेहनत करती हैं। जेजीपी ने यहां से स्वाति यादव को उतारा है। अगर 35-1 कोई फार्मूला है तो वह यहां भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ स्वाति यादव के पक्ष में जाना चाहिए। मगर नतीजे आपको बताएंगे कि ऐसा कोई फार्मूला नहीं है। पिछली बार यादव वोटों से धर्मवीर जीते थे मगर इस बार कहानी अलग है। स्वाति यादव के मैदान में होने से श्रुति की प्रसन्नता बढ़ गई है। राहुल गांधी ने भी उनके लिए प्रचार किया।

हिसार सीट पर अगर कोई कहता है कि 35-1 चलेगा तो वह वहां से कांग्रेस की जीत की बात करता है। मगर 35-1 की बात करने वाले कन्नी काट लेते हैं। क्योंकि यह मंत्र तो भाजपा की जीत के लिए फूंका जाता है। भाजपा और जेजेपी दोनों ने यहां से जाट प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। कांग्रेस ने कुलदीप बिस्नोई के पुत्र भव्य बिस्नोई को टिकट दिया है। भव्य हरियाणा के तीसरे लाल भजन लाल के पौत्र हैं। दादा के वोटबैंक पर पोते का स्वाभाविक क्लेम बनता है। भाजपा ने यहां सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने वाले चौधरी बीरेंद्र सिंह के आईएएस बेटे बृजेंद्र सिंह को टिकट दिया है। वह किसान नेता सर छोटू राम के परिवार से हैं। जेजेपी से मौजूदा सांसद दुष्यंत चौटाला मैदान में हैं। वह ताऊ देवी लाल के पौत्र हैं। पिछली बार दुष्यंत इनेलो की टिकट पर जीते थे। चाचा अभय चौटाला से पटरी न बैठने पर अपनी अलग पार्टी बना ली। जो नेता राजनीति में बढ़ते परिवारवाद को मुद्दा बनाते हैं, उन्हें हिसार सीट का अध्ययन अवश्य करना चाहिए। देश की राजनीति की नब्ज को समझना है तो वह बनारस में नहीं इस बार हिसार जैसी सीटों पर धड़क रही है।


करनाल ऐसी सीट है, जहां 35-1 का फार्मूला काम कर जाए। क्योंकि यहां लड़ाई ही 35 में है। कुरुक्षेत्र में कांग्रेस के नवीन जिंदल चुनाव लड़ने से इनकार कर चुके हैं। उन्हें हर घंटे साठ लाख का नुकसान हो रहा है। यह उनका कहना है। यहां से भाजपा के पूर्व सांसद राजकुमार सैनी जोर शोर से बागी हुए थे। पांच साल बड़ा शोर किया। अब चुनाव के समय नामांकन भी ठीक से नहीं भर सके और शांत हैं। भाजपा के नायब सिंह सैनी खुलकर ताल ठोक रहे हैं। इनेलो से अभय चौटाला के छोटे पुत्र अर्जुन चौटाला से उनका मुकाबला है। कांग्रेस के निर्मल सिंह भी मैदान में हैं मगर उनमें जिंदल वाली बात नहीं है। नायब सिंह के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रैली करने आए। एक दिन पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मोदी की तुलना अहंकारी दुर्योधन से की थी। अगले ही दिन मोदी कुरुक्षेत्र में थे। कुरुक्षेत्र रैली में मोदी ने अपनी दुखती रग भी साझा की। कहा-नामदार परिवार उन्हें गाली देता है। उनके दुख में पूरा हरियाणा कितना भावुक हुआ है यह 23 मई को उन्हें भी पता चल जाएगा।

गुरुग्राम में राव इंद्रजीत अब भी अहीरों के एक मात्र बड़े नेता हैं। वह स्वतंत्रता सेनानी राव तुलाराव के वंशज हैं। वह किसी भी पार्टी में रहें कोई फर्क नहीं। अब देखना है कि लालू प्रसाद यादव के समधि और कांग्रेस प्रत्याशी कैप्टन अजय यादव केंद्रीय मंत्री को कितनी चुनौती दे पाते हैं।

फरीदाबाद में भी गणित भाजपा के पक्ष में है। कांग्रेस ने यहां प्रत्याशी बदल कर अवतार सिंह भड़ाना पर दाव खेला है। कई जगह घूमकर वापस आए भड़ाना क्या कर पाते हैं, यह नतीजे बता देंगे। आम आदमी पार्टी के लिए यहां प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद लड़ रहे हैं। यमुना का पानी जब बैक मारता है तो फरीदाबाद तक लौटता है। इस हाड़ सुखाऊ गर्मी में दिल्ली में कोई लहर बची होगी तो नवीन तक जरूर पहुंचेगी।

हरियाणा में दो सुरक्षित सीटें हैं। अंबाला इस बार भाजपा के लिए उतनी सुरक्षित नहीं मानी जा रही है, जैसी पिछले चुनाव में थी। यहां से उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। यहां अनिल विज के अक्खड़पन और तौर तरीकों का बोझ भी रत्नलाल कटारिया को उठाना पड़ सकता है। कटारिया के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह यह समझकर बैठे थे कि उन्हें टिकट मिलना ही नहीं, इसलिए पांच साल से पब्लिक के बीच नहीं जा रहे थे। हालांकि यह हालत भाजपा के ज्यादातर सांसदों की रही। अच्छे दिन कब आएंगे जैसे सवालों का उनके पास जवाब नहीं था और जितने भी शर्मदार सांसद थे, वे पांच साल जनता से नजरें चुराते रहे। ऐसे में कांग्रेस की कुमारी सैलजा अपना पुराना रुतबा हांसिल करने के लिए पूरा जोर लगा रही हैं। यहां सीधा मुकाबला है, इसलिए किसी तीसरे की बात नहीं। उनके लिए प्रियंका गांधी ने रैली की।

दूसरी सुरक्षित सीट सिरसा पिछली बार इनेलो के खाते में गई थी। यहां मुकाबला इसबार त्रिकोणीय है। इनेलो ने अपने मौजूदा सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी पर ही दांव लगाया है। कांग्रेस ने एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर को उतारा है, जो पिछले चुनाव में रोड़ी के सामने दो लाख से ज्यादा मतों के अंतर से हारे थे। भाजपा ने सुनीता दुग्गल को टिकट दिया है। वह अपना पिछला विधानसभा चुनाव हार चुकी हैं। मगर यहां सिरसा सीट पर उन्हें मोदी लहर पर बड़ा भरोसा है। जेजेपी ने यहां निर्मल सिंह मल्हेड़ी को चुनाव लड़ाया है। कांग्रेस और भाजपा दोनों इस बात से खुश हैं कि ताऊ देवीलाल का वोट बैंक चौटला परिवार में जितना ज्यादा बंटेगा, उतना ही फायदा होगा।
अब बात करते हैं रोहतक और सोनीपत की, जहां भाजपा फिर 35-1 के सहारे है। हुड्डा के गढ़ को भेदने के लिए भाजपा ने इस बार रोहतक से पुराने कांग्रेसी और कभी हुड्डा के खास रहे अरविंद शर्मा को मैदान में उतारा है। पंजाबी, ब्राह्मण और बाकी बिरादरियों के सहारे दीपेंद्र हुड्डा से सीट छीन लेने की तैयारी की जा रही है। पंजाबी समुदाय और अन्य जातियों पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अच्छी पकड़ रही है। वह रोहतक के विकास के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में देखना है कि क्या 35-1 चला या नहीं। सोनीपत में भी कहानी ऐसी है। कांग्रेस ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मैदान में उतार कर अपना सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। हुड्डा सोनीपत के दमाद हैं और दामाद को कोई खाली हाथ नहीं लौटाता, यह बात हुड्डा पर टिप्पणी करने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी अनुभव कर चुके होंगे। भाजपा के मौजूदा सांसद रमेश कौशिक के लिए राहत की बात यह है कि जेजेपी ने दिग्विजय सिंह चौटाला को मैदान में उतार दिया है। भाजपा समझ रही है कि समीकरण जींद चुनाव जैसे हैं मगर हरियाणा की राजनीति में सुरजेवाला और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कद का फर्क भी सोनीपत के नतीजे तय कर देंगे। यह वही दिग्विजय हैं, जिन्होंने जींद में सुरजेवाला से दूसरा स्थान भी छीन लिया था। मगर इसबार उन्हें यहां दांव उल्टा पड़ सकता है।

हरियाणा की यह चुनावी बिसात बताती है कि धर्म और जाति के नाम पर बांटने का खेल नेता अपनी सुविधा के अनुसार ही खेलते हैं। जहां धर्म का कार्ड चलता है वहां हिंदू –मुसलमान करते हैं और जहां यह नहीं चलता, वहां भी 35-1 जैसे फार्मूले ढूंढ लेते हैं। जनता को इनके बहकाने में नहीं आना चाहिए। ये नेता हैं। चुनाव जीतने के बाद पाकिस्तान भी जाते हैं। बिरयानी भी खाते हैं और कुछ तो ऐसे हैं जो जाकर पांव भी छूते हैं और देश में हिंदू-मुसलमान करते हैं और पाकिस्तान भेजने की बात कहते हैं।

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