Wednesday, March 20, 2019

अटकी भटकी चाल, बता रही है हाल

मंथन करने से मक्खन निकलता है। मगर ज्यादा देर मथना पडे़ तो समझो दूध फट चुका है। फुटकें फेल जाएंगी। नतीजा अनुकूल नहीं होगा।


भाजपा की पहली सूची अटकी हुई है। चिंता सिर्फ यूपी ही नहीं, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात भी है।

जैसा कि पिछले लेख 'यूपी खटकी, सूची अटकी` में बताया था कि यह मंगलवार उसके बाद ही सूची जारी हो पाएगी। वैसा ही हो रहा है। मंथन करने से मक्खन निकलता है। मगर ज्यादा देर मथना पडे़ तो समझो दूध फट चुका है। फुटकें फेल जाएंगी। नतीजा अनुकूल नहीं होगा। ज्यादा मक्खन निकलने वाला नहीं।

एक सप्ताह से मोदी और शाह रोज कोर कमेटी के साथ मंथन पर बैठते हैं। पर पहली सूची नहीं निकल पा रही। बहुत से सांसद दोबारा उसी सीट से टिकट नहीं चाह रहे।

राजस्थान में पिछली बार 25 की 25 सीटें भाजपा को मिली थीं। मगर इसबार ऐसा नहीं दिख रहा। पिछले विधानसभा रुझान को ही मानें तो आधे से ज्यादा सीटें खतरे में हैं।

2014 में मध्यप्रदेश में 29 में 27 सीटों पर कमल खिले थे। तबसे सतपुड़ा के जंगलों में बहुत से पत्ते झड़ चुके हैं। प्रदेश से भाजपा की सरकार ही झड़ गयी है। ऐसे में 27 कमल अब दूर की कौड़ी है।

पिछले लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र  में 23 सीटें भाजपा और 21 शिवसेना के पास थीं। इसबार भाजपा नेतृत्व को वहां पुल गिरते नजर आ रहे हैं।

गुजरात में  सभी 26 सीटें जीतने वाली भाजपा इसबार तीन लड़कों की वजह से घबराई हुई है। तीनों ने कांग्रेस के साथ मिलकर वहां सीधे भाजपा की जडो़ं पर आरी रख दी है।



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