Tuesday, July 31, 2018

चौकीदार का स्विस एकाउंट

एक चौकीदार था। वह बहुत भूखा था।

भोजन की तलाश में वह एक बाग में गया। वहां पेड़ पर एक उद्योगपति बैठा था। उसके पास पनीर का टुकड़ा था।

पनीर का टुकड़ा देखकर चौकीदार के मुंह में लार आ गयी। उसने उद्योगपति से कहा - ये पनीर मुझे दे दे।

उद्योगपति बोला - क्यों दूं ? मुझे क्या मिलेगा?

चौकीदार ने कहा - मैं चौकीदार हूं। यह देश मेरे ही भरोसे चलता है। तुम कल बैंक आना और जितना पैसा चाहे विदेश भेज देना। उसका बीस परसेंट मेरे स्विस एकाउंट मेंं भी डाल देना।

उद्योगपति ने आश्चर्य से पूछा - चौकीदार! तुम्हारा स्विस बैंक में एकाउंट है?

चौकीदार ने कहा - मैं जहां सास बहू देखता हूं, उसके दूसरे, तीसरे और चौथे पति के नाम से जितनेभी एकाउंट हैं, वे सब मेरे ही हैं।

**
अगले दिन तय समय पर उद्योगपति बैंक पहुंचा। चौकीदार उसके पास जाकर पीठकर खडा़ हो गया। उद्योगपति एक हाथ से चौकीदार की पीठ सहलाता रहा और दूसरे हाथ से पैसा अपने एकाउंट में ट्रांसफर करता रहा।

चौकीदार हर आने जाने वाले से मुसकरा कर कहता- उद्योगपति के साथ खडा़ होने से मैं हिचकता नहीं। गांधी जी भी उद्योगपति के साथ थे।

पूरा बैंक खाली हुआ तो उद्योगपति विदेश उड़ गया।

**

स्विस बैंक ने सालाना रिपोर्ट जारी की कि इस साल सास बहू के पतियों का पैसा दोगुना हो गया है।

हंगामा मचा तो चौकीदार ने अपने जमूरे को खडा़कर पूछा- बता तो जमूरे स्विस बैंक में पैसा बढा़ या कम हुआ?

जमूरा- हुजूर कम हुआ।

हिजडो़ ने खुश होकर ताली पीटी और समवेत स्वर में गाने लगे- सजी रहे चौकीदार तेरी मां सुनहरी गोटे में।

Saturday, July 28, 2018

देश की नींव

नागपुर में लाठी को
तेल पिलाया जा रहा है
और आप पूछते हो
देश का पैसा किधर जा रहा है

एक गंजे की चांद जहां
माथे से मिलती है
उसे ही अब इस देश का
क्षितिज बताया जा रहा है
और इस  क्षितिज से
कोई सूर्योदय नहीं होता
धर्म और जाति का लबादा ओढे़
नफरत के स्याह अंधेरे
चंदन और केसर के त्रिपुंड से ठंडे किए
इस क्षितिज से निकलकर बारी बारी आते हैं

गंजा एक नेता के कान में बता रहा है
इस बार चुनाव ईवीएम या वोट से नहीं
लट्ठ से होगा और
देश भट्ठ से बैठ जाएगा

मगर वह नहीं जानता
त्रिपुंड लगी कोई गंजी चांद
इस देश का क्षितिज नहीं हो सकती
कोई लट्ठ इस देश को भट्ठ नहीं कर सकता
क्योंकि यह देश
बलात्कारी बाबाओं के धर्म पर नहीं
प्रेम की नींव पर टिका है।।
#सुधीर_राघव

Friday, July 27, 2018

परिवार तुम्हें पवित्र करेगा

शैतान ने कहा- मैंने बैंकों को लूट लिया। उद्योगों को तबाह किया। जमीनें कंकरीट की कर दीं। शिक्षा को बर्बाद कर दिया। किसानो और कामगारो! तुम जीवित रहने के लिए पकौडे़ बनाओ।

भीड़ ने कहा- हम अंतरिक्ष यान बना सकते हैं। परमाणु के सूक्ष्म से सूक्ष्मतर कण का भेद बता सकते हैं। मशीनों को चलाने का हुनर जानते हैं। हम मिट्टी से सोना उगा सकते हैं। तब पकौडे़ तलने का आदेश क्यों?

शैतान ने कहा- मैं सास-बहू देखूंगा। मुझे सुरा और पकौडे़ ही चाहिए। तुम सब जीवित रहने के लिए पकौडे़ बनाओ।

तभी फरिश्ता वहां आया और कहने लगा - शैतान! तुम सास-बहू को छोड़ो। अपने गृहस्थ धर्म का पालन करो। परिवार तुम्हें संस्कार सिखाएगा। तुम्हें प्रेम सिखाएगा। एकाकी जीवन ने तुम्हें लंपट और शैतान बना दिया है। परिवार तुम्हें पवित्र करेगा।

भीड़ चिल्ला उठी - परिवार तुम्हें पवित्र करेगा। अपने गृहस्थ धर्म का पालन करो।

शैतान की आंखों से आंसू बहने लगे। वह बेहोश होकर गिर पड़ा।
*************
(पूरी तरह धार्मिक पोस्ट । राजनीतिक टिप्पणी करने से बचें।)
सादर व सप्रेम
 #सुधीर_राघव

Thursday, July 26, 2018

शैतान का तोहफा

शैतान ने कहा- गधी मां है।  जो उसे बंधक बनाएगा मैं उसे कत्ल कर दूंगा। बरतन बनाने वाले! कपडे़ धोने वाले! सब अपनी गधी मुझे सौंप दें। मैं दो सौ गधियां नर्क के राज को तोहफे में दूंगा।

यह सुनकर सारे कमेरे रोने लगे। उनके आंसुओं से धरती गीली हो गयी। रोते हुए उन्होंने शैतान से पूछा-गधी तुम्हें दे दें तो हम कैसे जिएंगे?

शैतान ने कहा- मां के आगे तुम्हारी जिंदगी कुछ भी नहीं। तुम सब बलिदान दो।

तभी फरिश्ता बोल उठा - मां इस धरती पर ईश्वर का तोहफा है। तुम किसी और को मां तोहफे में नहीं दे सकते।मां को तोहफे में देना पाप है?

कमेरों की भीड़ चिल्लाई- हां यह पाप है। मां को तोहफे में देना पाप है। ईश्वर तुम्हें माफ नहीं करेगा।

शैतान भयभीत होकर भाग गया।

*********
पूर्ण धार्मिक
कृपया राजनीतिक टिप्पणी से बचें।
सादर और सप्रेम
#सुधीर_राघव

Wednesday, July 25, 2018

फरिश्ता और शैतान

उसकी एक आंख में प्रेम था। दूसरी आनंद से आधी मुंदी थी।

उसने उपस्थित भीड़ से कहा- प्रेम ही ईश्वर है। ईश्वर ही प्रेम है। प्रेम ही धर्म है। धर्म ही प्रेम है।

यह सुनकर शैतान पागल हो उठा। उंगलिया नचाते हुए उसने अट्टहास किया-झूठ। प्रेम ईश्वर नहीं हो सकता। ईश्वर वह मूर्ती है जो मैंने बनाई है।

भीड़ चिल्ला उठी - प्रेम ही ईश्वर है। ईश्वर ही प्रेम है।

भीड़ के उद्घोष में शैतान का अट्टहास खो गया। शैतान डर कर भाग गया।

प्रवचन : श्री श्री सात अरब राघवानंद
रचना शैली :  खलील जिब्रान

यह पूरी तरह धार्मिक पोस्ट है, कृपया राजनीतिक टिप्पणी से बचें।
सादर एवं सप्रेम
#सुधीर_राघव

फरिश्ता और शैतान

उसकी एक आंख में प्रेम था। दूसरी आनंद से आधी मुंदी थी।

उसने उपस्थित भीड़ से कहा- प्रेम ही ईश्वर है। ईश्वर ही प्रेम है। प्रेम ही धर्म है। धर्म ही प्रेम है।

यह सुनकर शैतान पागल हो उठा। उंगलिया नचाते हुए उसने अट्टहास किया-झूठ। प्रेम ईश्वर नहीं हो सकता। ईश्वर वह मूर्ती है जो मैंने बनाई है।

भीड़ चिल्ला उठी - प्रेम ही ईश्वर है। ईश्वर ही प्रेम है।

भीड़ के उद्घोष में शैतान का अट्टहास खो गया। शैतान डर कर भाग गया।

प्रवचन : श्री श्री सात अरब राघवानंद
रचना शैली :  खलील जिब्रान

यह पूरी तरह धार्मिक पोस्ट है, कृपया राजनीतिक टिप्पणी से बचें।
सादर एवं सप्रेम
#सुधीर_राघव

Sunday, July 22, 2018

मॉब लिंचिग


कुत्ते की तरह
गले में
किसी खास पार्टी का पट्टा पहने
वे सड़क पर
आपको दम निकलने तक
घेरकर पीटेंगे
क्योंकि उनका मालिक यही चाहता है

वह एक खास इशारे के साथ
हुश्श्श करके
इन्हें सड़क पर छोड़ता है
आपके पीछे

यह किसी
एक गली
एक मोहल्ले
एक शहर
की बात नहीं है
देश की हर सड़क पर
एक खास पार्टी का पट्टा डाले
कुत्ते बैठे हैं
उस इंसान की ताक में
जिसमें इंसानीयत की
गंध अभी बाकी है
और जो गुंडा नहीं हुआ है

इन कुत्तों को
किसी का डर नहीं
कोई कानून
इनके आगे काम नहीं करेगा
क्योंकि इनके गले में है
एक खास पार्टी का पट्टा
क्योंकि
सत्ता में है
गुंडों की
गुंडो के लिए
गुंडी सरकार।

#सुधीर_राघव

Friday, July 20, 2018

बेनीरज दुनिया



नेता नफरत बोते हों
और भीड़ के हाथ में हों डंडे
अस्सी साल के बुजुर्ग को
जब पीट रहे हों मुसटंडे

ऐसे दारुण वक्त में भी
इक प्रेम कवि का मर जाना
कहो ईश्वर यह न्याय है क्या
मानवता के कवच कुंडल का
रण से पहले छिन जाना

विष्णु तुम छलिया निकले
या नफरत के राक्षस ने फिर
शिव से पा वरदान लिया
या अहंकारी रावण ने
जुमलों में सर का दान दिया
दानव का भय दिखलाने को
यह कैसी लीला कर डाली
बेनीरज दुनिया कर डाली
बड़ी नीरस दुनिया कर डाली

#सुधीर_राघव

महाभारत में राम की वंदना क्यों नहीं की व्यास ने

क्या ऋग्वेद में मूर्तिपूजा है?

क्या मूर्ति बनाकर उसे ईश्वर मानने का विधान है?

क्या ऋग्वेद में अमरनाथ, बद्रीनाथ, मां वैष्णोदेवी का वर्णन है?

क्या मूर्तिपूजा सनातन पद्धति है?

ऋग्वेद में यज्ञ से देवों का आह्वान है।

बौद्धों में मूर्ति निर्माण का प्रचलन था। जैनियों में भी।

रामायण में राम द्वारा शिवलिंग स्थापना और पूजन का प्रसंग है। महाभारत में भी मंदिर निर्माण के प्रसंग हैं।

मगर महाभारत में भगवान राम का जिक्र क्यों नहीं है, जबकि परशुराम और हनुमानजी का है?

रामायण को महाभारत से प्राचीन माना जाता है अत: उसमें कृष्ण का उल्लेख न होना संभव है। मगर व्यास द्वारा राम का कहीं जिक्र भी न करना आश्चर्य जनक है, जबकि ब्रह्मा विष्णु महेश इंद्र अरुण वरुण, राम के पूर्वजों सगर तथा भगीरथ तक का जिक्र है मगर विष्णु के 14 कला संपन्न अवतार की वंदना तक नहीं है। क्यों?

ऋग्वेद की शैली अह्वान, वंदना और संवाद है। दूसरीओर बौद्धों में जातक कथाओं और जैनियों में भी कथा शैली तथा उपदेश की प्रधानता है। हमारा पुराण युग वेद परंपरा से इतर कथा शैली प्रधान है। वैदिक काल में कठोपनिषद में नचिकेता की कथा है मगर वह भी समूचे संवाद के रूप में है।

ऋग्वेद से पुराणों तक यह स्पष्ट है कि हिंदू कोई एक धर्म नहीं है। यह हिंद महासगर से लेकर हिमालय तक और पारस की खाडी़ से लेकर बंगाल की खाडी़ तक की संस्कृतियों का मिश्रण है। इसमें कट्टरता के लिए कोई जगह नहीं।

हिंदू मूर्तिपूजा कर सकते हैं और यज्ञ भी। वे ऋचाएं भी गा सकते हैं और कथाएं भी बांच सकते हैं। हम तीस करोड़ देवताओं को भी पूजते हैं और हमारा ईश्वर एक भी है।

Tuesday, July 17, 2018

हर हर शंकर कहा करो

सुधीर राघव


हर हर शंकर कहा करो
नेता नेता न किया करो
चोर उचक्के होते नेता
इनसे बच कर रहा करो

जात धर्म में देश को बांटें
कुत्ते से भी गहरा काटें
अपना पंडाल खुद गिरवा लें
सहानुभूति की लहर उठा लें
लहर लहर मत बहा करो
हर हर शंकर कहा करो
चोर उचक्के होते नेता
इनसे बचकर रहा करो

खुद को गंगा पुत्र बताएं
वादे तोड़़ शिखंडी हो जाएं
सही नहीं हैं इनके इरादे
झूठे निकले सारे वादे
वादे शादे न रहा करो
हर हर शंकर कहा करो
चोर उचक्के होते नेता
इनसे बचकर रहा करो

काला धन न वापस आया
देश का सारा धन लुटवाया
दिल्ली में इक महल बनाया
नादिर शाह का वंश बसाया
शाह शाह न किया करो
हर हर शंकर कहा करो
चोर उचक्के होते नेता
इनसे बचकर रहा करो

खाली फोकट गाल बजाते
नित जनता की चिता सजाते
इनके पुल भीड़ पर गिरते
सारे चेनल वाहवाही करते
वाह वाह न किया करो
हर हर शंकर कहा करो
चोर उचक्के होते नेता
इनसे बच कर रहा करो
#सुधीर_राघव

Monday, July 16, 2018

महंगे डीजल पर ट्रांसपोर्टर्स की चुप्पी का रहस्य

पहले डीजल दो रुपये भी बढ़ता था तो ट्रांसपोर्टर हड़ताल कर देते थे। अब 70 रुपये लीटर है मगर कोई चूं नहीं। क्यों? काफी ट्रांसपोर्टर अब सरकार में शामिल हैं। ड्र्ग्स के धंधे से जुड़ गये हैं। इसमें इतना मुनाफा है कि डीजल 100 रुपये भी हो जाए तो इन्हें फर्क नहीं पड़ता।

डीजल महंगा लगता है उस किसान को जिसके धान सूख रहे हैं। बिजली आती नहीं, डीजल खरीदने की हिम्मत नहीं। ये मजबूर किसान सड़कों पर जाम लगाते हैं। यदा कदा अफसरों को घेर कर भी पीट देतें हैं मगर स्थिति जस की तस है। अफसरों के हाथ में कुछ नहीं। वे सरकार के आदेश से बंधे हैं और किसनों का गुस्सा झेलते हैं।

खूब पैसा खर्चकर ये जो सड़कों को चिकना बनाया जा रहा है?  ये जनता की मांग पर नहीं है। यह ड्रग तस्करों की जरूरत को देखते हुए खर्च किया जा रहा है। सिंथेटिक ड्रग्स को दूर दूर तक ले जाना पड़ता है। खराब सड़कों की वजह से बहुत से इंजेक्शन और शीशियां टूट जाती थीं।

कई पुलिस वाले ईमानदार भी होते हैं। टूटी सड़कों पर गाड़ी दौड़ने में भी तस्करों को दिक्कत आती थी। ये ध्यान रहे कि कुछ खास रूट की सड़कों के सुधार पर ज्यादा जोर है और ये ही रूट नारकोटिक्स ब्यूरो के नक्शे में रेड ग्रीन रूट हैं। रेड ओपियॉड्स के लिए और ग्रीन कैनाबीज के लिए।

Monday, July 9, 2018

डबल कमाई

मोदी जी ने
काती पूनी
चंद्रमणि के
धान थे चौपट
लेकिन आय
हो गई दूनी

और किसान
अब पूछ रहे हैं
मुंह में उंगली
कूच रहे हैं
"यो कै गुंताडा़
सै भाई?
चंद्रमणी की
डबल कमाई
म्हारे हाथ
लागत वी न आई

टैक्टर के
चावी ला
दिल्ली चालांगे
शाह मोदी ने
खत घालांगे
एक लुगाई की
डबल कमाई
कैसे होगी
बता रे भाई?

हमने वी दे
बता वो नुस्खा
जिसका तन्ने
पड़ रैया चस्का
मौज काटता
हांडी ज्या सै
हमने मारे
फौका मस्का

म्हारे गन्ने खातर
पीसा कौणी
चंद्रमणी चंद्रमणी
टीवी पै हो री
बिजली पानी
खेत में कौणी
धान रोप दें
ईसा कौणी

माल और मिहनत
पल्ले से लांवें
पूरा देश तद
रोटी खावै
तूं कै झूठे
लारे लावै
बोझ ब्याज का
बढ़ता जावै
रोज मुनीम
घर पै आवै
बैंक मुनादी
करके जावै
एक भाई ने
फांसी ला ली
खेत खलिहान
दोनों से खाली
जो कर्जा माफ
न करे कसाई
वो कै करगा
डबल कमाई

फिटनस चैलेंज
तन्ने देवां
बात खरी सै
मुंह पै कहवां
चंद्रमणी के
खेत म्ह जइये
घरां का हाल
वी देखता आइये
फिर जय शाह से
तू पूछना भाई
कैसे होती
डबल कमाई???

#सुधीर_राघव

Sunday, July 1, 2018

वीर सेना और कायर सम्राट

अमेरिका और यूरोपीय देश अपनी सेना का इस्तेमाल अफगानिस्तान, इराक, सीरिया, जार्डन जैसे दूसरे मुल्कों के खिलाफ करते हैं। दूसरे देश को फतह कर जब सैनिक लौटता है, गर्व से फूली जनता जहां से सैनिक गुजरता है खडे़ होकर सेल्यूट करती है।

मगर हमारा डरपोक और कायर शासक सेन को पाकिस्तान  नहीं जाने देता। खुद जाता है और पांव छूकर आ जाता है। वह अपनी ही सेना को अपने ही सिविलियन इलाकों में तैनात करता है। ऐसे कायर शासकों की वजह से दुनिया की नंबर वन सेना अपने ही देश में अपने ही लोगों से पत्थर खाने को विवश है।

हे कायर सम्राट! अपने ही देश में अपने वीर जवानों को कत्ल मत कराओ। उन्हें भी जाने दो। इस्लामाबाद पर तिरंगा फहराने दो। आतंकवाद को हमेशा के लिए मिटाने दो। हमारे जवानों ने पाकिस्तान के अंदर 200 किलोमीटर से अधिक दायरे में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक किया और तुमने उन्हें दाऊद और सईद को उठाकर लाने की इजाजत तक नहीं दी।

हे कायर सम्राट! तुम इजाजत देते तो सेना पठानकोट हमले के बदले नवाज शरीफ को उठा लाती। पाकिस्तान के चार टुकडे़ कर देती। वह 1971 में ऐसा करके दिखा चुकी है। मगर तुमने तो कायरता की हद पार करते हुए पठानकोट हमले की जांच ही आईएसआई को सौंप दी।

हमारे वीर जवानों को पत्थर पड़ने के लिए सम्राट तुम दोषी हो! क्योंकि तुम कायर हो। क्योंकि तुम सेना को पाकिस्तान नहीं जाने देते बल्कि खुद बिरायनी खाने पहुंच जाते हो।

एकबार सेना को पाकिस्तान जाने दो। मैं यकीन से कहता हूं सुबूत के लिए कोई वीडियो जारी करने की जरूरत नहीं होगी। लाहौर और इस्लामाद पर लहराता तिरंगा इसका सुबूत होगा। पिटा हुआ पाकिस्तान इसका सुबूत होगा।