Saturday, May 5, 2018

झूठ ऐसे पकड़ा जाता है...

वैज्ञानिकों ने मनुष्य के दिमाग का एक रहस्य खोज निकाला है।
आदतन झूठ बोलने वाले इंसान के दिमाग में ग्रे मेटर की तुलना में व्हाइट मेटर 27 फीसदी तक ज्यादा होता है।
फ्रंटल लोब से आने वाले भावनात्मक संकेतों (न्यूरोट्रांसमीटर) को यह व्हाइट मेटर अवरुद्ध कर देता है। इस तरह झूठ बोलने वाले के चेहरे पर झूठ बोलते वक्त भावनात्मक संकेत छुपे रहते हैं और वह सफाई से झूठ बोल लेता है।
बार बार झूठ बोलने से मस्तिष्क का फ्रंटल लोब बुरी तरह प्रभावित होता है और करीब करीब काम करना बंद कर देता है। ऐसा व्यक्ति अपनी पत्नी और बच्चों को छोड़ने में भी नहीं हिचकता। प्राय ऐसे ही लोग आदतन अपराधी होते हैं।
हमारी खुशी और आनंद को नियंत्रित करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर डोपामिन का उत्पन्न होना और संतुलन भी इन लोगों में प्राकृतिक न  रह कर खास परिस्थिति और चीज पर निर्भर हो जाता है।
जैसे कोकीन का सेवन करने वाले नशेड़ी का मस्तिष्क डोपामिन बनाना बंद कर देता है मगर जैसे ही वह कोकीन लेता है तो मस्तिष्क में स्वत: डोपामिन का संचार होता है। ऐसे ही अपराधियों में सिर्फ खास काम करने पर ही डोपामिन बनता है।
यह भी संभव है कि किसी झूठे व्यक्ति में सिर्फ विदेश यात्रा या किसी नेता को हग करने पर ही डोपामिन बनता हो। उसे सफलता से झूठ बोलने और ऐसे कामों में ही खुशी मिलती हो।
अत: आप भी किसी नेता का भाषण सुनकर यह अंदाजा लगा सकते हैं कि उसका फ्रंटल लोब एक्टिव है या नहीं। उसके झूठ बोलने की आदत से आप उसे पहचान सकते हैं। जिसका फ्रंटल लोब एक्टिव नहीं है, वह सिर्फ अपनी पत्नी ही नहीं देश को भी धोखा दे सकता है।

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