Sunday, April 29, 2018

अवेंजर्स : खलनायकों की जीत का दौर

दुनिया में यह खलनायकों की जीत का दौर है।

यही विषय है हॉलिवुड की नई फिल्म Avengers: Infinity War का। फिल्म मौजूदा वक्त का बेहतरीन रूपक है। खासकर जब धरती पर ट्रंप, मोदी, किम और जिनपिंग जैसे शासक हैं यह काल्पनिक गाथा बहुत कुछ कहती है।

56 इंच के सीने वाला खलनायक थेनोस नष्ट हुए ग्रह टाइटन से बेसिक स्टोन्स की तलाश में निकला। बढ़ती आबादी, घटते संसाधन और अभाव थेनोस जैसे खलनायकों को जन्म देते हैं। वह इतना शक्तिशाली हो जाता है कि उसके एक चुटकी बजाने से आधी आबादी खत्म हो जाती है।

छह डेजर (बेसिक) स्टोन (रत्न)- माइंड स्टोन, आत्मा का स्टोन, स्पेस स्टोन, पावर स्टोन, टाइम स्टोन और वास्तविकता का स्टोन पर ही यह ब्रह्मांड टिका है। इनसे भी ऊपर है ईगो स्टोन। ईगो स्टोन और पावर स्टोन से लैस थेनोस बाकी स्टोन्स की तलास में धरती पर पहुंचा है। थेनोस  एस्गार्ड की तबाही के बाद लूकी से डेजर एक्ट स्टोन छीनकर उसे मार देता है।

धरती पर थेनोस का पहला सामना सुपर हीरो हल्क से होता है। हल्क की इतनी धुनाई होती है कि वह फिर कभी हल्क नहीं बन पाता। 56 इंची सीने वाले खलनायक के सामने हल्क उस जनता का प्रतीक है जो दबाये और कुचले जाने पर अपनी पावर भूल जाती है।

थेनोस धरती के सारे सुपर हीरो को विपक्ष की तरह पराजित करता है। स्पाइडर मैन, डाक्टर स्ट्रेंज,  स्टार लार्ड, गंगोरा, ड्रेक्स, ब्लैक पेंथर मारे जाते हैं। थौर की कुल्हाडी़ उसे सिर्फ खरौंच भर पाती है। थ्री डी इफैक्ट में यह  पर्दे से निकलकर दर्शकों की तरफ ही आती है।

आयरन मैन के रोबोट विजन से थेनोस माइंड स्टोन निकाल लेता है। माइंड स्टोन पर कब्जा, मीडिया को कब्जे में लेने का ही रूपक है। इस तरह थेनोस की जीत के साथ फिल्म खत्म होती है। बचे हुए सुपर हीरो हताश हैं।

मगर आप हताश मत होइए। सच्चाई की ही जीत होती है। ईगो स्टोन खुद तबाह होता है। बस 2019 का इंतजार करें। अगले साल फिल्म का दूसरा भाग रिलीज होगा। बचे हुए सुपर हीरो मिलकर तीसरा मोर्चा बना लेंगे। हल्क अपनी पावर को पहचान लेगा। 56 इंच के सीने वाले थेनोस का अंजाम आप 2019 में देखेंगे।

Saturday, April 28, 2018

लाल किला मत बेच मियां

लाल किला है
लाल मियां
डालमियां मत
डाल मियां

पैसा होगा तेरा
माई बाप
इज्जत तो मत
बेच मियां
तू चीन का
चमचा होगा
फिक्स है तेरा
मैच मियां

तिरंगा अपनी
शान है प्यारे
अपने देश का
मान है प्यारे
तू माया मत
खैंच मियां
लाल किला मत
बेच मियां

व्यापारी तो
व्यापार करेगा
अपने तोते
लाल करेगा
जब आएगी
15 अगस्त
सीधा अपना
माल करेगा
देश की रख
तू लाज मियां
लाल किला है
लाल मियां
डालमियां मत
डाल मियां
#सुधीर राघव

Friday, April 27, 2018

सुनो लखन है बात पुरानी

सुनो लखन
है बात पुरानी
सत्ता पाये नर
होत अभिमानी

राज मिला
सुग्रीव बिसारा
जा के लिए
बाली मैं मारा
सोई छल अब
भाजपा कीन्हा
राज मिला
मंदिर न दीन्हा

मस्जिद तोड़ी
मिला न मंदर
हम घुटते
अंदर ही अंदर
पाप चढ़ा वह
नाम हमारे
ता दिन ते
हम अति दुखारे

मस्जिद में भी
हम रहते थे
अल्लाह अल्लाह
सब कहते थे
राम अल्लाह में
नूर है एक ही
जैसे लहू का
रंग है एक ही
जैसे मानस की
जात है एक ही
जैसे अनहद में
नाद है एक ही

मेरे नाम पर
जो लड़ता है
रौरव नरक में
सो पड़ता है
सत्ता के मद
चार विचारा
काम मोह
मद लोभ अपारा

भ्रात वचन सुन
लखन रिसियाये
कमल नयन में
राम बसाये
प्रभु आज्ञा
तो मैं जाऊं
धरा समेत
राजा लै आऊं
जिसके बल
कांपा दसकंधर
उस राम का
बना न मंदर

कृपानिधान ने
कृपा बरसाई
धीर धरो तुम
छोटे भाई
सुनो लखन
है बात पुरानी
सत्ता पाये नर
होत अभिमानी।।
#सुधीर #राघव

Thursday, April 26, 2018

बाबा अंधा बटेर सयानी

बाबा अंधा
बटेर सयानी
हुए शर्म से
पानी पानी

सुनो सुनाऊं
एक कहानी
बुड्ढे को थी
चढी़ जवानी

आव न देखा
ताव न देखा
करता रहा
खुली मनमानी
नेता उसके
पांव पखारें
वो यौवन की
वाट निहारे
राम राम का
नाम उचारे
मगर देह में
काम पुकारे

कन्या रूप में
दुर्गा आई
पहचान सका न
आताताई
जैसे ही की
उसने नादानी
याद दिला दी
उसको नानी
लोहे का
पिंजरा मंगवाकर
बांध दिया
सबक सिखाकर
फूट फूटकर
रोये अज्ञानी
बाबा अंधा
बटेर सयानी
हुए शर्म से
पानी पानी
#सुधीर #राघव

Tuesday, April 24, 2018

डीजल महंगा पहनकर लहंगा

डीजल महंगा
पहन कर लहंगा
मियां पंहुचे चीन
नागिन जैसी झूम गई
जब बजी पूंछ पर बीन

हर्ले डेविडसन
तन मन और धन
देख रहे थे मून
जब ट्रंप ने गले लगाया
खिसक गई पतलून

कुर्ता आधा
झूठा वादा
मियां पहुंचे जापान
जा पानी में छलांग लगाई
हुआ तेल स्नान

नेतन्याहू
कुएं पर प्याऊ
मियां पहुंचे इस्राइल
हथियारों के सौदागर को
देते रहे स्माइल

नवाज की अम्मा
मियां निकम्मा
जा पहुंचा लाहौर
चाट चाटकर चरण वो बौला
दोस्त बडा़ है प्योर

दाढ़ी चिट्टी
उल्टी पट्टी
मियां पढे़ विद्वान
महाभारत के इंटरनेट से
टपक रहा था ज्ञान

कसी पजामी
कच्ची आमी
मियां चढ़ गये नीम
हाथी जैसे सेटेलाइट
फेंक रहा था भीम

पांव में चप्पल
निकले तुक्कल
मियांं ने छेड़ी तान
लालकिले पर लगे सुबकने
कौआ ले गया कान
#सुधीर #राघव

Monday, April 23, 2018

अपने वक्त से


नेता ने मिस्र से सीखा मिसरा घिसा तो दीपक प्रकट हुआ - क्या हुकम है आका।

नेता - जाओ जांच की याचिका खारिज कर दो।

दीपक ने नेता को घिसा तो बेकांइया प्रकट हुआ - क्या हुक्म है मेरे आका।

'महाभियोग रद्द कर दो।'

दीपक भक्क से जला। चारों ओर का उजाला पी गया और दिन में अंधेरा छा गया।

दुस्शासन का फैसला

दुर्योधन की सभा में
दुस्शासन का क्या फैसला होगा
धर्मराज सी मौन हो जनता
कुशासन का क्या फैसला होगा

राजा और काजी हों राजी
बरी किये जाएं अपराधी
गुंडे सड़कों पर खुल्लम खुल्ला
बढा़ रहे हों आबादी
न्याय के चीरहरण पर
प्रशासन का क्या फैसला होगा

कांइयां और बेकाइंया का अंतर
अब नहीं बचा है भाई
है चीन ही चाचा उसका
करे पाक में पांव छुआई
काले धन पर पलता नेता
कुशासन का क्या फैसला होगा

सुनो चिराग के घिसने पर
जिन्न नहीं आता है
अब मिस्रा घिसने पर
दीपक प्रकट हो जाता है
न्याय नेता संग पतंग उड़ाये
दुस्शासन का क्या फैसला होगा
#सुधीर #राघव

Sunday, April 22, 2018

अपने वक्त को हम लिखेंगे

अपने वक्त को हम लिखेंगे
क्या तू वक्त खरीदेगा
न्याय बिका हो धर्म बिका हो
पर वक्त से कैसे जीतेगा

तू हिटलर का अंडा होगा
मैं तो वक्त का डंडा हूं
तू टोने का गंडा होगा
मैं बाला जी का झंडा हूं
तेरी सेना भगवा सेना
मैं राष्ट्र का तिरंगा हूं
तू पाप का भरा समंदर
मैं पतित पावनी गंगा हूं
जहां रिश्ते र से बनते हैं
क्या तू रक्त खरीदेगा
अपने वक्त को हम लिखेंगे
क्या तू वक्त खरीदेगा

तू नीरव का सन्नाटा होगा
मैं अॉडिट का झन्नाटा हूं
तू मेहुल की बिरयानी होगा
मैं गरीब का आटा हूं
तू चीन का चमचा होगा
मैं भारत का पतीला हूं
तू तंगदिल फितरत होगा
मैं दिल का थोडा़ ढीला हूं
साबरमती के संत के पीछे
तू रिवर फ्रंट पर झूलेगा
अपने वक्त को हम लिखेंगे
क्या तू वक्त खरीदेगा
कवि बिका हो कलम बिकी हो
पर शब्द को कैसे खरीदेगा

शब्द हमेशा पीठ पर अपनी
सच को लेकर जाएगा
दिल से निकली बात को लेकर
दिल के अंदर जाएगा
तेरे झूठ की गठरी को
हर एक गधा ले जाएगा
जाकर उसको हांक ले प्यारे
किसी धर्म की चौखट पर
वो तुझे खडा़ मिल जाएगा
अपने वक्त को हम लिखेंगे
क्या तू वक्त खरीदेगा
न्याय बिका हो धर्म बिका हो
पर वक्त से कैसे जीतेगा
#सुधीर #राघव

Saturday, April 21, 2018

हिंदू नवजागरण

सारे जानवर हिंदू हो गये
जंगल में हिंदू राज हुआ
नजर पड़ी जब बस्ती पर
हर हिंदू को वनवास हुआ

गधा कूद राजा बन बैठा
वित्त भार उल्लू का हुआ
गोल चश्म बुद्धि का मोटा
कैश बैंक से गायब हुआ

रेल थमाई गई सांप को
हर पटरी पर खेल हुआ
हजम किया तत्काल रिफंड
इंजन पटरी पर फेल हुआ

रक्षा मंत्रालय में नागिन बैठी
बेमतलब फुफकार हुआ
देख लाल चींटियों की सेना
छुप बांबी में दीदार हुआ

रोज फेशियल करा करा
गधा तो अप टू डेट हुआ
पढे़ं तेल और बेचे फारसी
नई गधी से मेल हुआ

जैसा राजा वैसी प्रजा
जंगल में हाहाकार हुआ
वसंत नहीं आया उस साल
सुना बच्चियों से रेप हुआ

एक कवि को खरीद गधे ने
अपनी धुन में राग किया
सारे सुर बेताल पडे़ थे
न तबले पर थाप हुआ

तीन ताल पर ठुमरी गूंजी
जनता में सिंहनाद हुआ
हर हिंदू हिंदू बन बैठा
लट्ठों से शृंगार हुआ

टूटी कमर गधे की जैसे
रूठी गधी ने मार दिया
जंगल पर जो कर्ज चढ़ा
जंगल ने ही उतार दिया

#सुधीर #राघव

Tuesday, April 17, 2018

धर्म

धर्म
अब धर्म नहीं रहा
गिरगिट हो गया है
दिखेगा अलग अलग रंग में
कंगूरों पर चढ़कर भगवा
गुम्मदों पर हरा
कहीं पीला
तो मीनारों पर सफेद हो जाता है

जब भीड़ के हाथ में
झंडा बनकर आता है
तब धर्म सबसे खतरनाक होता है
आगजनी
बलात्कार
आतंक और
दंगे में बदल जाता है धर्म

इस गिरगिट को छोड़कर
आओ चलें उस दिशा में
जिधर महावीर
गौतम
ईसा
मूसा
नानक
और कबीर गये

जिधर बैठा है
एक अकाल पुरुष
जिसकी छाया में लीन है
राम कृष्ण और सोलह अवतार
उससे निकली रोशनी
सारे जगत को रोशन करती है
उसमें सातों रंग समाये हैं
और
उसका अपना कोई रंग नहीं
वही मेरा धर्म है।
#सुधीरराघव

Sunday, April 15, 2018

भारत की सोना खोदने वाली चींटियां

भारत में जो चींटियां सोना खोदा करती थीं, वे कहां गयी?

ईसा से 400 साल पहले और बुद्ध और महावीर के समकालीन इतिहास के पिता कहे  जाते हेरोडोटस ने इन चींटियों का जिक्र किया है। आश्चर्यजनक तरीके से हेरोडोटस की यह बात महाभारत के सभा पर्व में भी आती है।

हेरोडोटस उस जमाने में इतना लिख गये कि आज दुनिया में द हिस्टरीज नाम से 600 पेज की किताब है। इस किताब में पेज 187 पर हमें इंडियन कहा गया है। ऐसा कालातेयी समाज जो अपने बुजुर्गों के मर जाने पर उनका मांस आग में भूनकर खाता है। उसमें बहुत से राज्य हैं जहां अलग अलग भाषा है। कुछ नदी किनारे रहते हैं। मछलियां पकड़ते हैं। सरकंडों से बने वस्त्र पहनते हैं।

पर्शियन राजा साइरस को इंडियन ने सबसे ज्यादा 360 टेलेंट्स स्वर्ण भस्म उपहार में दी थी। ( 1 टेलेंट=35किग्रा)

हेरोडोटस के अनुसार इंडिया के उत्तर में कैस्पटाइरस और पेक्टाइक देश हैं। ये इंडियन रेत से सोना निकालते हैं। इन रेतीले स्थानों पर कुत्ते से थोड़ी छोटी और लोमड़ी से कुछ बड़ी चींटियां होती हैं जो रेत खोदकर मांद बनाती हैं और उनमें सोना निकलता है। पर्शिया का राजा भी अपने साथ ऐसी कयी चींटियों को ले गया था। 

इन चींटियों का ऐसा ही जिक्र महाभार के सभा पर्व में आता है, जब दुर्योधन कहता है - कोई पाप  न करने वाला मेरी बात सुने। सेलोडा नदी जो उत्तर में मेरू और मंदार पर्वत के बीच बहती है वहां के खश, एकाशन, परदरा, दीर्घनेव, कुणिंदास, पशुपाश और तड्ंगा राजाओं ने द्रोनो में भर भरकर युद्धिष्टर को पिपीलिकै सोना भेंट किया है, जो उन्होंने रेत की चींटियों की मदद से इकट्ठा किया था। 

(सभार Aakar Patel/The Hindu)

महाभारत संदर्भ सभापर्व

मेरुमंदरयोर्मध्ये शैलोदामभितो नदीम्, ये ते कीचकवेणूनां छायां रम्यामुपासते। खशाञ्झखाश्चनद्योतान् प्रघसान्दीर्घवेणिकान्, पशुपांश्च कुलिंदांश्च तंगणान परतंगणान्।'
ते वै पिपीलिकं नाम वरदत्तं पिपीलिकै: जातरूपं दरोण मेयम अहार्षु: पुञ्जर्शा नृपा:||

Saturday, April 14, 2018

जब जब धर्म को ग्लानि होती है, मैं उसका उत्थान करने स्वयं आता हूं : ईश्वर

इंसानीयत और धर्म में से किसी एक को चुनना पडे़ तो इंसानीयत को चुनना।
अगर इंसानीयत बची रही तो धर्म और भी बनाए जा सकते हैं, क्योंकि दुनिया के सारे धर्म इंसानीयत से ही बने हैं।
राक्षस हमेशा धर्म का इस्तेमाल इंसानीयत के खिलाफ करते हैं। उनके लिए धर्म सदैव इंसानीयत से बडा़ होता है। वे ईश्वर की उपासना कर ऐसे वरदान प्राप्त करते हैं जिससे इंसानीयत को शर्मिंदा कर सकें।

दूसरी ओर इंसानीयत के हक में ईश्वर सदैव धर्म की जंजीरों को खंड खंड करते हैं। धर्म में ब्राह्मण सिर्फ पूजनीय था मगर भगवान राम ने रावण का वध कर धर्म की रूढी़ को तोड़ दिया। इंसानीयत से हीन इंद्र जब लोगों को अहंकारवश प्रताङित करता है बाल कृष्ण घोषणा करते हैं कि हम इंद्र पूजा के वैदिक विधान को नहीं मानेंगे और  हम इंद्र की पूजा नहीं करेंगे।

ईश्वर हमेशा इंसानीयत के साथ है। अगर तुम इंसानीयत के हक में धर्म की कुरूतियों को नहीं मानते तो राक्षस ही तुम्हें तंग करेंगे मगर ईश्वर तुम पर स्नेह लुटाएगा।

Wednesday, April 11, 2018

चार लाख साल पुरानी है इंसानों की पहली भाषा

इंसानों की पहली भाषा भौंहें मटकाना ही थी।

असल में यह इंसानों के इंसान बनने से भी पहले की भाषा है। वैज्ञानिकों का एक ताजा शोध तो यहां तक दावा करता है कि भौहों की भाषा ने एक जीव में उस बौद्धिक विकास की नींव रखी जिसकी परिणीति आधुनिक मानव है।

जरनल नेचर इकोलॉजी एंड इवोलुशन में छपे शोध के मुताबिक आज से 6 लाख साल से 2 लाख  साल पहले की अवधि के बीच होमो हीडलबर्जेनसिस में नर मादा और सामुदायिक संवाद भौंहे मटका कर करने की शुरुआत हुई। भौंहें मटकाने से मस्तिष्क पटल की अग्रपंक्ति का विकास शुरू हुआ।

इस क्रमविकास से तीन इंटेलीजेंस प्रजातियां निंडरथल्स, डेनिसोवन्स और आधुनिक मानव विकसित हुए। निंडरथल भी इंसानों की तरह पत्थर के हथियारों का इस्तेमाल करते थे मगर योग्यता की लडा़ई हार गये और 40000 साल पहले लुप्त हो गये।

डेनिसोवन्स भी उसी दौर में खत्म हुए। इंसान का विकास जारी रहा। होमो हीडलबर्जेनसिस के भौंहें मटकाने के प्रयासों ने आज के इंसानों को इतना ताकतवर बनाया।

शायद यही वजह है कि जब दक्षिण की एक फिल्म में नायिका और नायक ने भौंहें मटकाईं तो रातोंरात लोकप्रिय हो गये।
आखिर भौंहें मटकाना हमारे पूर्वजों की पहली भाषा है और हमारे डीएनए को यह झट समझ आती है और दिल को भाती है।

दुनिया के वैज्ञानिक जो बात वर्षों के शोध के बाद जान पाते हैं। वह हम भारतीय पहले से जानते हैं। भौंहों की भाषा बताने में भी हमारे एक फिल्मवाले ने बाजी मार ली।

Friday, April 6, 2018

दुनिया के नेताओं के प्रकार



साहूकारों से दोस्ती और मीडिया से वैर - डोनाल्ड ट्रंप

देश चलाए बातों से, माल उड़ाए खातों से - मोदी

नंगा नहाये क्या और निचोडे़ क्या - शाहिद खाकन अब्बासी

मिर्जा मारे सीरिया, रोये वाशिंगटन - पुतिन

माओ माओ जपना, पराया माल अपना - शी जिनपिंग

ओ शाबजी तुम चंदन घिसो में चीन को तिलक करता है - खडग प्रसाद ओली

तुम हमारा कार बेचो, हम तुमको बुलेट ट्रेन देगा - शिंजो अबे

हग मी हग मी, टर्न मी ओन - नेतन्याहू

बीवी को झुमका मिला रे, काशी के बाजार में - इमानुएल मैंक्रों

पहले बस चलाते थे और बस ठोकते थे, अब देश चलाते हैं तो देश ठोक दिया - निकोलस मुदरो

Thursday, April 5, 2018

देश में बाबाओं के प्रकार



पराये फल पर बुरी नजर रखने वाला - फलाहारी बाबा

जहां देखी आशा, वहीं करे तमाशा - आसाराम

गुरु की मति के विपरीत चलने वाला - गुरमीत राम रहीम

नित नया आनंद करने वाला - नित्यानंद

आंख का आधा, गांठ का पूरा - रामदेव

अयोध्या गये तो दूषण, यमुना गये तो प्रदूषण - रविशंकर

उत्तराखंड का जोगी जोगना पर यूपी का सिद्ध - योगी

गंगा मैली छोड़ दी, करा खजाना साफ - उमा

फिल्मी धुन पर नाचे, उल्टा सीधा बांचे - राधे मां

कृपा की दुकान, वसूली के पकवान - निर्मल बाबा

कांकर पाथर जोड़ के केस लिए बनवाय - रामपाल

अंधा लपके रेवडी़, जब अक्ल का अंधा दे - नर्मदानंद



Wednesday, April 4, 2018

धरती का एक देश

पहले उन्होंने हिंदू मुसलमान को बांटा फिर अगडो़ं पिछडो़ं को।... क्योंकि किसीने उन्हें ऐसा करने को कहा था।

वे सत्ता में आते ही पाकिस्तान पांव छूने गये, ...क्योंकि किसी ने उन्हें ऐसा करने को कहा था।

उन्होंने डीजल-पेट्रोल के दाम छदम तरीके से बढा़ए, उन्होंने रोजगार खत्म किए, उन्होंने शिक्षण संस्थानों को बर्बाद किया...क्योंकि किसी ने उन्हें ऐसा करने को कहा।

उन्होंने चुनावी संस्था और बैंकिंग संस्था कि स्वायत्तता को रौंद डाला। उन्होंने इलेक्शन कमीशन, रिजर्ब बैंक, शिक्षा बोर्ड और अदालतों में अपने गुलाम बैठाए...क्योंकि किसीने उन्हें ऐसा करने को कहा था।

उन्होंने युवाओं से डाक्टर, इंजीनियर,वैज्ञानिक बनने के सपने छीने और उन्हें चाय-पकौडा़ बेचने और प्लंबर बनने के सपने दिखाए... क्योंकि किसी ने उन्हें ऐसा करने को कहा था ।

इतिहास लिखेगा...
....जिस देश में देशभक्ति का मुखौटा लगाकर देशद्रोही सत्ता में आए थे उसे जनता ने जूझकर बचाया। जनता ने जब शासकों के मुखौटे उतारे तो पीछे चीन और अमेरिका निकले।. ..एक गंजा था और दूसरे के सिर पर बाल कृत्रिम तरीके से उगाये गये थे।

Sunday, April 1, 2018

चने से सस्ती चने की दाल, ये कैसा खेल और किसका माल

आजकल बाजार में काले चने से सस्ती चने की दाल बिक रही है। कभी नब्बे-सौ रुपये किलो बिकी यह दाल आजकल 52 से 55 रुपये किलो बिक रही है। काले चने के दाम 58 से 65 हैं।

यह क्या खेल है और यह कैसे संभव? चने से ही बनने वाली चीज उससे ही सस्ती बिक रही हो। इन सवालों के जवाब खोजोगे तो जान जाओगे कि सरकार किसानों को कैसे बर्बाद करती है।

चने की नई फसल बाजार में आने वाली है। किसान अच्छे दाम की उम्मीद कर रहा। मगर किसान की फसल बाजार में आने से पहले ही सरकार ने 7 लाख टन दाल स्टाक व्यापारियों को बहुत ही सस्ते दाम पर थमा दी है। दाल से व्यापारियों के गोदाम भर गये हैं। ऐसे में वे दाल के लिए किसान से महंगे दाम चना क्यों लेंगे।

किसान जब चने की फसल लेकर मंडी पहुंचेगा तो खरीदार कम होंगे। ऐसे में कौडि़यों के भाव फसल बेचने को किसान मजबूर होगा।

नेता को चंदा व्यपारी ही देता। किसान नहीं देता। अन्ना एक प्रायोजित फ्लाप नाटक खेलकर किसानों पर सरकार की जीत का जूस पी चुके हैं।

सरकार के दाल के इस खेल में सबसे ज्यादा किसे फायदा है? अगर इसका अनुमान लगाना है तो रिलायंस के रिटेल स्टोर, अडानी की थोक फूड चेन और बाबा की किसी दुकान का चक्कर लगा आएं।