Friday, January 26, 2018

उत्तराखंड की सरस्वती और हरियाणा की सरसुती में असली कौन

क्या गोमुख पर ऐसे कोई संकेत हैं जो बताएं कि यहां से गंगा की मूल जलधारा निकालने का कभी कोई इंसानी प्रयास हुआ था?

क्या आदीग्रंथ को लिपीबद्ध करने वाले लोग मीठे पानी की हर उस जलधारा को सरस्वती कहते थे, जहां वे बसना चाहते थे?

पहले सवाल का जवाब खोजकर हम भागीरथी की पौराणिक कथा को ऐतिहासिक साबित कर सकते हैं तो दूसरे सवाल के जवाब में कयी संकेत आज भी मौजूद हैं।

पवित्र गंगा की दो मुख्य धाराएं हैं । एक भागीरथी और दूसरी अलखनंदा। भागीरथी की धारा गोमुख ग्लेशियर से निकलती है तो अलखनंदा की सतूपनाथ ग्लेशियर से। भागीरथी नाम सूर्यवंशी महाराज सगर के वंशज भगीरथ से जोडा़ जाता है। रामायण और स्कंद पुराण के अनुसार भगीरथ ही भागीरथी की धारा निकालकर लाये थे इस शोध के लिए गोमुख पर मानवीय प्रयासों के निशान तलाशे जाने चाहिए।

अब बात उस सरस्वती नदी की जो उत्तराखंड में बहती है।  यह बद्रीनाथ के माना गांव के पास केशव प्रयाग में आकर अलखनंदा में मिल जाती है। इस नदी पर एक पत्थर का प्राकृतिक पुल है जिसे भीम पुल कहा जाता है। भीम द्वारा इसे बनाये जाने की कथा है। पांडवों के वानप्रस्थ में इस तरफ ही आने के कयी संकेत हैं।

क्या पांडवों का इधर आना ऋग्वेद के नदी सूक्त के उसी आह्वान की परिणीति है जिसमें कहा गया है कि हे वीरो!आपका प्राचीन घर, आपकी संपत्ति जाह्नवी के तट पर है।

अगर सरस्वती नदी उत्तराखंड में बहती है और अलखनंदा में मिल जाती है तब वह कौन सी सरस्वती है, जो आदि बद्री से निकल रही और हरियाणा सरकार जिसे पुनर्जीवित करने के लिए खूब खर्च कर रही है?

ऐसे ही सवालों पर चर्चा अगले लेख में। (क्रमश:)

1 comment:

Sunil Abhimanyu said...

बढ़िया लेख सर, अगली कड़ी का इंतजार रहेगा।