Sunday, January 21, 2018

तैमूर ने तबाह किया था सरसुती शहर



क्या आप जानते हैं कि पांच से छह सदी पहले तक सिरसा को सरसुती कहा जाता था। यह घग्गर के तट पर है।

घग्गर के ही सरस्वती होने के काफी प्रमाण मौजूद हैं। सन 1333 की सर्दियों में विद्वान इब्न बतूता भाटनेर (हनुमानगढ़), सरसुती और हांसी शहरों के रास्ते ही दिल्ली पहुंचे थे। सरसुती और भाटनेर में राजपूतों का राज था। तब घग्गर में इतना पानी बहता था कि बतूता के अनुसार इस इलाके में धान और गन्ने की खेती होती थी।


सन 1398 में तेमूर की सेना ने मुलतान से भाटनेर और सरसुती पर हमला किया। तब इन शहरों की आबादी दस हजार से ज्यादा थी। तेमूर की सेना ने बडे़ पैमाने पर कत्लेआम कर इन शहरों को नष्ट कर दिया था।

घग्गर के ही सरस्वती नदी होने के और साक्ष्यों की चर्चा हम अगले लेख में करेंगे। (क्रमश:)

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