Thursday, December 21, 2017

मोदी जी! आपकी सरकार या तो मूर्ख चला रहे हैं या भ्रष्ट

2000 का नोट चलाना मूर्खता थी। यह एक बड़ा छपाई घोटाला भी है। RBI ने वार्षिक रिपोर्ट में खुद माना है कि इस नोट ने लेनदेन में बाजार में काफी दिक्कतें पैदा की हैं और ये जरूरत से ज्यादा छापे गये।

ये नोट इतनी बडी़ संख्या में छापे गये कि करीब ₹2463  अरब मूल्य के नोट रद्दी की तरह पडे़ हैं और कभी बाजार में उतारे ही नहीं गये। वित्तमंत्री ने लोकसभा में यह बात खुद कबूली हे कि ₹7308 अरब मूल्य के दो हजार के कुल 36540 लाख नोट छापे गये। इनमें से मार्च तक सिर्फ ₹3501 अरब मूल्य के सिर्फ 17505 लाख नोट ही बाजार में उतारे जा सके। यानी आधे से ज्यादा नोट तब रददी की तरह पडे़ थे। पिछले छह माह में भी चलन में ज्यादा नहीं बढे़ हैं।

यह माना जा रहा है कि अब भी कम से कम से 2463 अरब मूल्य के नोट रद्दी की तरह पडे़ हैं।

आबादी के लिहाज से प्रति व्यक्ति 70308 रुपये मूल्य के 2000 के नोट छापे गये। दूसरी ओर देश की प्रति व्यक्ति मासिक आय 6244 रुपये के आसपास है।

ऐसे में देश की प्रतिव्यक्ति मासिक आय से ज्यादा सिर्फ एक बडे़ नोट को छपवाना या तो मूर्खता थी या फिर बडा़ घोटाला। कमीशनखोरी का कोई बडा़ खेल।

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