Sunday, November 12, 2017

भंसाली की खामख्याली

जितना बजट भंसाली की फिल्म का होता है उतना किसी यूनिवर्सिटी को इतिहास पर रिसर्च के लिए नहीं मिलता। विषय ऐतिहासिक चुनना और तथ्यों के नाम पर कहना कि यह इतिहास नहीं मनोरंजन है।

यह एक तरह की बौद्धिक गुंडई है। जैसे गुंडे लोगों को बंधक बनाकर पैसा कमाते हैं ठीक वैसे ही भंसाली तथ्यों को अंधेरे में बंदकर जनता से इतिहास के नाम पर झूठ दिखाकर वसूली करने में माहिर है।

इतिहास के नाम पर हमें झूठा मनोरंजन नहीं चाहिए। इतिहास के नाम पर सिनेमाघरों में जाकर झूठ देखना सिर्फ मूर्खता को बढा़वा देना है।

अगर एक ऐतिहासिक फिल्म बनाने के लिए आपके पास अरबों रुपये (पद्मावती ₹180-190 करोड़ तथा  बाजीराव मस्तानी र 145 करोड़) का बजट है तो आप इससे किसी यूनिवर्सिटी को जोड़ लें। पूरा समय लें और आराम से फिल्म तैयार करें। रिसर्च को प्रोत्साहन मिलेगा। पैसा बनावटी और वाहियात सेट्स पर न लुटेगा।

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