Tuesday, September 5, 2017

नकली हर हर और असली गंगा

मोदी जब खुद हर हर हुए तो उन्हें सबसे पहली चिंता गंगा की हुई।

उन्होंने ठाना कि इस पतित पावनी गंगा को निर्मल किया जाए। तत्काल एक मंत्रालय बनाया और गंगा को निर्मल करने कि जिम्मेदारी उमा को सौंप दी। साथ ही 27 हजार करोड़ का भारी भरकम बजट भी थमा दिया।

कैलाश पर महादेव खुद गंगा को धारण करते हैं और उसका ख्याल रखते हैं। मगर अपने ये नकली हर हर असल में उमा और गंगा के परस्पर बोध को भांपने में विफल रहे।

शिव पुराण में ऐसी कथा मिलती है कि गंगा भी देवी पार्वती की तरह भगवान शिव को पति रूप में पाना चाहती थी। देवी पार्वती नहीं चाहती थी कि गंगा उनकी सौतन बने। फिर भी गंगा ने भगवान शिव की घोर तपस्या की। इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इन्हें अपने साथ रखने का वरदान दे दिया। इसी वरदान के कारण जब गंगा धरती पर अपने पूरे वेग के साथ उतरी तो जल प्रलय से धरती को बचाने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में लपेट लेते हैं, इसतरह गंगा को भगवान शिव का साथ मिल जाता है।

अब नतीजा सबके सामने है। गंगा जस की तस है। मैं न घोटू भंग की तर्ज पर उमा ने कह दिया, ले संभाल अपनी गंगा और मंत्रालय उल्टा मुंह पर दे मारा।

 27 हजार करोड़ कहां गये? उमा से यह पूछने की हिम्मत भी नकली हर हर में नहीं है।



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