Wednesday, August 30, 2017

अगस्त में मुंबई

सुधीर राघव 

अगस्त क्रांति का महीना है। यह एकाधिकारवादी बुरी फिरंगी राजनीतिक सत्ता के खिलाफ हुंकार का महीना है।

मगर जिन संगठनों ने 1942 की अगस्त क्रांति में हिस्सा नहीं लिया और अंग्रेजों के लिए दिहाड़ी पर हिंदू - मुस्लिम के बीच खाई खोदते रहे, उनके लिए अगस्त बच्चों की मौत का महीना है।

उनके लिए अगस्त मासूमों की आक्सीजन सप्लाई रोकने का महीना है। गोरखपुर और जमशेदपुर रचने का महीना है। अगस्त उनके लिए पंचकूला है। यह उनके लिए सिरसा में शीर्षासन है। यह उनके लिए इंटरनेट बंद करने और कंपनियों का करोडों का डाटा बचवाने का महीना है।

अगस्त क्रांति का उद्घोष 1942 में मुंबई में हुआ था। देश हर साल मुंबई के उस  गौरव को याद करता है। मगर उनकी यादें कहतीं हैं कि मुंबई तो हर साल अगस्त में बारिश से डूबता है।

दूसरी ओर देश कहता है कि मुंबईवासी हर साल अपने हौंसले से बारिस और आपदा को मात देते हैं। मुंबई अपनी गति से दौड़ता है। अपने आवेग से धड़कता है।

इसी नब्ज को पहचानकर गांधीजी ने अगस्त क्रांति के लिए मुंबई को चुना। मुंबई को बीएमसी पर नहीं खुद पर भरोसा है।

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