Tuesday, June 28, 2016

शाखा बाबू हिम्मत दिखाओ

सुधीर राघव
सुनो शाखा बाबू ! ये तुम जो आधे अधूरे फैसले लेते हो न इससे कुछ नहीं होने वाला।
एनएसजी पर विरोध के बाद जो तुमने चीनी दुग्ध उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया है, इससे क्या होगा शाखा बाबू? तुम्हे लगता है कि इससे चीन डर जाएगा और हमारा समर्थन कर देगा।
नहीं शाखा बाबू। नहीं। इससे कुछ नहीं होगा। बल्कि चीन इससे खुश होगा कि मेरे विरोध पर बस इतना ही कर सका भारत।
आज तो हालत यह है कि देश के खेल उद्योग, खिलौना उद्योग, लघु उद्योग, मझौले उद्योग। सबको चीन चौपट कर रहा है। और तो और अब तो हमारे आम भी चीन से मंगाई एसिटिलीन से पकते हैं। साठ साल से आजमाए जा रहे शुद्ध भारतीय तरीके कार्बाइड को तुमने झूला झुलाते झुलाते प्रतिबंधित कर दिया। अरबों डालर भारत से चीन जा रहा है।
शाखा बाबू। मौका है तुम्हारे पास। चीन के विरोध का जवाब देते हुए चीन से आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दो। इससे देश के उद्योग में नई जान आ जाएगी और चीन भी घुटनों पर आ जाएगा। विशाल आबादी वाला एक बङा बाजार हाथ से निकलते ही ससुरा चीन मंदी से मर जाएगा या फिर हमारी शर्तें मानेगा।
शाखा बाबू। चीन की अक्ल ठिकाने लाने का असली तरीका तो यही है मगर इससे आपूर्ति घटने पर महंगाई बढ़ सकती है। वह तो तुम्हारे काला बाजारी दोस्त अब भी बढाए हुए हैं। इसलिए जनता सह ही लेगी।
नहीं तो दूसरा तरीका भी है। यह तुम पहलाज निहलानी और अनुपम खेर से सीखो। पाकिस्तान की तरह ही चीन का चमचा बन जाओ। दोस्त दोस्त कहते हुए हर महीने जाओ आओ। मगर चीन इसके लिए जमीन मांगेगा तो पाकिस्तान का उत्तरी हिस्सा जीतकर डवलपमेंट के लिए चीन को दे दो।
शाखा बाबू। बस यही दो रास्ते हैं। तुम इनमें से किस एक को चुनने की हिम्मत दिखा पाओगे।

Monday, June 27, 2016

करो करो करने से होगा

सुधीर राघव
करो करो करने से होगा
न तेरे डरने से होगा
जीते जी जो न कर पाया
क्या तेरे मरने से होगा
करो करो करने से होगा
सुनो शिखर की सभी सीढ़ियां
चढ़ो चढ़ो चढ़ने से होगा
करो करो करने से होगा
नफरत से बेलौस लङाई
लङो लङो लङने से होगा
करो करो करने से होगा

Sunday, June 26, 2016

शाखा बाबू

सुधीर राघव
सुनो ! शाखा बाबू! अभी कुछ खत्म नहीं हुआ है।
थोङी समझदारी दिखाओ। चीन जाओ। आस्ट्रिया जाओ। न्यूजीलैंड जाओ। वहां की संसद और सीनेट को संबोधित करो। उन्हें भारत का दोस्त बनाओ। अगले साल फिर NSG के लिए बैठक होगी।
ये तुम बारबार अमेरिका जाते हो न। ,..तो । वहां से देश के लिए कुछ नहीं लाते। उल्टा देकर ही आते हो।
साखा बाबू! जब तुम पहली बार अमेरिका जाकर लौटे तो 346 जैनरिक दवाएं यानी साल्ट प्रतिबंधित कर दिए। माना तुम पर अमेरिकी दवा कंपनियों ने दबाव डाला होगा। मगर इसका मतलब ये तो नहीं कि गरीबों को सस्ती दवा ही न मिले। एक रुपये में मिलने वाली उनकी दर्द की गोली। जुकाम की गोली पर प्रतिबंध लगा दिया। अब उसी दर्द के लिए खर्चो 20 रुपये।
शाखा बाबू! जब तुम दूसरी बार अमेरिका से लौटे तो देश के सैन्य हवाई अङ्डे अमेरिका के लिए खोल दिए। देश की संप्रभुता का भी ख्याल न किया। माना ओबामा का दबाव होगा। ... मगर इसका मतलब यह तो नहीं कि देश को अमेरिका के लिए अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसा बना दो।
शाखा बाबू ! तुम तीसरी बार अमेरिका से लौटे तो रक्षा और फार्मा क्षेत्र को सौ फीसदी निवेश के लिए खोल दिया। रक्षा क्षेत्र की अमेरिकी कंपनियां भारत में बैठकर हथियार बनाएंगी और एशिया के सारे आतंकी संगठनों को सप्लाई करेंगी। अमेरिकी प्रशासन उन्हें कभी आतंकी संगठनों को हथियार बेचने से नहीं रोक पाया तो तुम कैसे रोकोगे। उनकी फार्मा कंपनिया यहां बैठकर मोर्फिन बनाएंगी। तुम कैसे रोकोगे शाखा बाबू।
शाखा बाबू ! इसके बदले में भारत को अमेरिका से क्या मिला? बस इतना ही कि ओबामा भी हनुमान जी की पूजा करते हैं। ओबामा हिंदुओं को गले लगाते हैं।
ओबामा ने तुम्हें बुरी तरह बनाया शाखा बाबू।
ओबामा ने साबित कर दिया कि तुम सिर्फ शाख पर बैठे हो। तुम देश की हर शाख पर बैठे हो शाखा बाबू। हर शाख पर!!!
... अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा!!!!

Saturday, June 25, 2016

योग और बौद्धिक विकास का संबंध

सुधीर राघव
क्या योग करने से बौद्धिक विकास भी होता है? इसे हम एक प्रयोग से जांच सकते हैं।
वर्ष 2006 से ही भारत को NSG की सदस्यता के प्रयास गंभीरता से चल रहे थे। रूस और फ्रांस पहले से ही हमारे साथ थे।
फ्रांस तो हमें इंदिरा के जमाने से ही परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में मदद करता रहा है। संवर्धित यूरेनियम के लिए आस्ट्रलिया भी सहोगी रहा है।
2008 में अमेरिका से परमाणु करार की बात चलने पर अमेरिका, ब्रिटेन सहित ज्यादातार देश भारत के समर्थन में आ गए थे। मगर मनमोहन तब इतना जानते थे कि जब तक चीन सहित सभी 48 देश राजी नहीं हो जाते दरवाजे नहीं खुलने वाले।
मोदी इस मामले में इतने नासमझ निकले कि पहले से राजी अमेरिका, रूस फ्रांस के मानने को ही उन्होंने अपनी बङी सफलता मानकर ढोल पीट दिया। आगे भक्तों और चमचा चैनलों ने उस पर सफलता के नगाङे बजा दिए।
इति सिद्धम : अत:यह जरूरी नहीं कि योग करने से बौद्धिक विकास भी हो।

Tuesday, June 21, 2016

नित उड्डयन योग

सुधीर राघव
लोकतंत्र के सिंहासन पर बैठी नेत्रहीन जनता योग दिवस का हाल जानने को व्याकुल थी। उसने मीडिया को बुलाया और पूछा...
जनता उवाच : हे मीडिया! आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर देश और दुनिया में योग हो रहा है। तू उसका वृतांत भली प्रकार मुझ से कह। सुबह सुबह पति या पत्नी के हाथ से मिलने वाली बेड टी और निद्रा का मोह त्यागकर योग के लिए जुटे हजारों लोगों का सब हाल मुझ से कह। नेताओं मंत्रियों और बाबाओं ने जो आसन किए वह और उनका फल भी विस्तार से कह।
मीडिया उवाच : हे रा-जन ! में देश विदेश में चल रहे हजारों योग कार्यक्रमों को प्रत्यक्ष देख रहा हूं। इनमें से कुछ का वृतांत तुम से कहता हूं।
तुम्हारे प्रिय नरेंद्र मोदी ने चंडीगढ़ के कैपिटल काम्पलैक्स में तीस हजार लोगों के बीच पवन मुक्त मुद्रा में नित उड्डयन नामक योग किया। सब वाह वाह कर उठे। रा-जन ! इस योग के करने से कुछ नहीं होता मगर वाहवाही खूब मिलती है।
प्रिय कहने से चिढ़ने वालीं सबकी अप्रिय ईरानी ने भोपाल में आंखें बंदकर जेएनयू नामक योग किया। इस योग के करते ही देश के लोग देशद्रोही नजर आने और पाकिस्तान और चीन मित्र।
फरीदाबाद में अमित शाह ने एक लाख लोगों के बीच दोनों हाथ फैलाकर चंदा बटोर नामक योग किया। इस योग के करते ही कालाबाजरियों की मौज लग गई और महंगाई बढ़ गई।
सुषमा स्वराज ने बुर्का पहन नामक योग किया। इस योग के करते ही वह बीमार पङ गईं। मतिभ्रम के वशीभूत चीन और पाक से सहोयग का बयान देने लगीं।
कांग्रेस ने जगह जगह विरोध योग किया। इसे करते ही बङा अजीब माहोह बन गया। पार्टी में ही परस्पर विरोध के स्वर गूंजने लगे। इसके प्रभाव में संघ ने भी सरकार के एफडीआई पर फैसले का विरोध शुरू कर दिया।
केजरीवाल ने टैंकर भेजे नामक योग किया और जांच एजेंसियां उनके पीछे पङ गई।
जनता उवाच : नाना प्रकार के इन योगों से पब्लिक का क्या हाल हुआ? विस्तार से कहो।
मीडिया उवाच : है रा-जन ! पब्लिक का हाल पूछ कर आप मुझे और खुद को संकट में न डालें। पब्लिक की हालत का सच बयां करने वाले देशद्रोही कहे जाते हैं। उन्हें भक्तगण नाना प्रकार से दंडित करते हैं।

Sunday, June 12, 2016

मोदी सिद्धांत

सुधीर राघव
अमेरिकी कांग्रेस के दो सांसदों का वार्तालाप
एक : यह अमेरिका की खुशकिस्मती है कि भारत में आज भी मोदी जैसे नेता पैदा होते हैं।
दो : कैसे?
एक : अब युद्ध और आपातकाल में हम भारतीय एयरबेस का इस्तेमाल कर सकते हैं। मध्य एशिया में अब हम कहीं भी बेहिचक कार्रवाई कर सकते हैं।
दो : हमने भी तो ऐसी स्थिती में भारत को अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति दी है।
एक : एसी स्थिति हा हा हा। आपको क्या लगता है कि भारत को इसकी जरूरत पङेगी। भारत क्या कनाडा या जापान पर कार्रवाई करेगा। हा हा हा। यह समझौता उनके किसी काम का नहीं।
दूसरा : अगर ये समझौता उनके किसी काम का नहीं तो मोदी ने क्यों किया?
एक : बिना लाभ का ऐसा समझौता करने वाले सिर्फ भारत में ही मिल सकते हैं। दो सौ साल पहले भारतीय राजाओं ने अंग्रेजों से ऐसे ही समझौते किए थे, जिनमें उनका अपना कोई फायदा नहीं था। तब अंग्रेजों का सौभाग्य था। अब हमारा है। हा हा हा।
दूसरा : मगर हम भी तो NSG पर भारत को समर्थन दे रहे हैं।
एक : इसमें भी भारत को कोई फायदा नहीं। जब तक चीन विरोध करेगा सदस्यता नहीं मिलेगी।
दूसरा : यानी हमारा समर्थन दिखावा है। हा हा हा। तो ऐसे समझौतों को क्या नाम दिया जाए। एक : मोदी डॉक्ट्रीन यानी मोदी सिद्धांत। दूसरा : वाह! इसपर तो तालियां ही नहीं स्टैंडिंग ओवेशन भी बनती है। हा हा हा।

Saturday, June 4, 2016

अच्छा हुआ जो जांच रिपोर्ट रामायण और गीता न हुई

सुधीर राघव
हरियाणा में फरवरी में दंगे हुए। मई में अफसरों और नेताओं में हाहाकार मचा है। कारण है-दंगे पर प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट। रिपोर्ट ने पुलिस और प्रशासन की पोल खोल कर रख दी। अब एक मंत्री कह रहे हैं कि यह रिपोर्ट क्यों मानी जाए। यह न रामायण है और न गीता। रिपोर्ट भी अधूरी है। उधर, प्रकाश सिंह ने भी कह दिया है कि अगर मनचाही रिपोर्ट लिखनी है तो मंत्री खुद लिख लें। जो काम मुझे सौंपा गया सो मैंने किया।
जरा कल्पना करो कि वह रामायण और गीता जैसी रिपोर्ट कैसी होती, जिसे मंत्री जी आंख मूंद कर मान लेते। रामायण में भी ज्यादा हिंदू हृदय प्रिय तुलसी की रामचर‌ित मानस शैली है। इसलिए हमने एक ठेठ भक्त से दोबारा रिपोर्ट तैयार करवाई, जो कुछ इस प्रकार बनी....।
वंदनाकांड
अक्षरों, अर्थ समूहों, रसों, छंदों और सभी प्रकार के मंगलों को करने वाले प्रधानमंत्री जी की मैं वंदना करता हूं।
श्रद्धा और विश्वास के स्वरूप केंद्रीय गृहमंत्री जी की मैं वंदना करता हूं।
ज्ञानमय, नित्य और सत्यरूपी गुरु मुख्यमंत्री जी की मैं वंदना करता हूं।
राज्य के गुणसमूह रूपी पवित्र वन में व‌िहार करने वाले विशुद्ध विज्ञान संपन्न अफसरों की मैं वंदना करता हूं।
जिनकी माया के वशीभूत यह सारा कांड रस्सी के सर्प के भ्रम के भांत‌ि प्रतीत होता है उन सभी 36 बिरादरी की मैं वंदना करता हूं।
मैं उस मंत्रिमंडल की वंदना करता हूं, जो कृपा का समुद्र है और जिसने मुझ अभागे को इस महान काम के लिए चुना।
सबसे पहले उन सभी लाठी, डंडों, बंदूक और तमंचों की वंदना करता हूं, जिनकी वजह से मुझे यह सौभाग्य मिला।
सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और यह नेताजी के साथ पुरानी संगत का ही प्रताप है क‌ि मुझे जांच करने के इस पुनीत कार्य के लिए चुना गया।
उद्देश्यकांड
सभी नेता और अफसर बड़े ही सरल हृदय के और स्नेही होते हैं। मेरी प्रेम से पगी इस रिपोर्ट को पढ़कर वे मुझे अपने चरणों में प्रीत ही देंगे। ऐसा मेरा विश्वास है।
निष्कर्षकांड
विधाता ने इस जड़-चेतन विश्व को गुण-दोषमय रचा है। तब हमला करने वालों और हमला सहने वालों, घर जलाने वालों और जलने वालों, पीड़ा से हाय-हाय चिल्लाने वालों और मूक बने रहने वाले अफसरों और नेताओं का क्या दोष?
मैं दंगों की रिपोर्ट तैयार करना चाहता हूं, परंतु मेरी बुद्धि छोटी है और दंगों की कथा अथाह। मेरा मन और बुद्ध‌ि कंगाल है मगर मनोरथ राजा। परंतु
मुझे विश्वास है कि मेरी रिपोर्ट पढ़कर सब नेता और अफसर सुख ही मानेंगे मगर दुर्जन और पीड़ित हंसी उड़ाएंगे।
मेरी रचना भले ही सभी गुणों से रह‌ित है मगर इसमें एक जगत प्रस‌िद्ध गुण है। यह गुण बिना बताए भी आप समझ ही जाएंगे और मैं अपनी रिपोर्ट खत्म करता हूं।

Wednesday, June 1, 2016

सरकार या निर्मल दरबार

टीवी पर एक महिला आती है। अरे! वही जिसने अपनी बेटी का नाम उज्जवला रखा है।
क्या वह सचमुच बीपीएल परिवार की वह महिला, जिसे एक करोङ लोगों के सब्सिडी छोङने पर गैस कनेक्शन मिला है। या सिर्फ माडल है, जिसे लोगों के सब्सिडी छोङने से बचे पैसे से भुगतान कर विज्ञापन तैयार किया गया है।
निर्मल बाबा पर यह आरोप लगते रहे हैं कि वह अपने विज्ञापन में नए माडलों को भक्त के रूप में पेशकर अपना कृपा का धंधा चमकाते रहे हैं। यहां तो अब सरकार ही निर्मल दरबार की तरह चल रही है।