Sunday, August 23, 2015

पाकी

सरहद के पार वो नफरत उगाते हैं
अमन के पैगाम पर आंखें दिखाते हैं
हमारी दुश्मनी कुछ इतनी पुरानी है
दोस्ती की बात पर हम मुंह की खाते हैं
मुखौटों में मोहब्बत हो नहीं सकती
इतने फ़रेबी हैं कहां चेहरा दिखाते है
लड़ाइयों और तबाहियों में नहीं आए
मजे तो यार गलबाहियों में ही आते हैं
- सुधीर राघव

Sunday, August 9, 2015

मोदी की गजेंद्रगीरी

कुछ लोग खुद को महान साबित करने के लिए उन लोगों पर ही अत्याचार करते हैं जो उन्हें प्रेम करते हैं। पत्नी प्रेम करे तो उसे छोड़ देते हैं। इस वाहवाही के लिए किे देखिए देश के लिए या मां के लिए पत्नी को छोड़ दिया।
न्याय पाने के लिए जिस तरह गांधीगीरी की जाती है ठीक उसके विपरीत जनता को सताने के लिए गजेंद्रगीरी की जाती है। गजेंद्रगीरी का अर्ध है कि जनता को सताने के लिए उस पर अयोग्य लोगों को थोपना।
इस गजेंद्रगीरी की खोज का श्रेय मोदी जी को जाता है। जनता ने चुनाव में उन पर भरपूर प्रेम लुटाया। प्रेम का बदला वह सता कर चुका रहे हैं , क्योंकि उनका यह भ्रम पुख्ता है कि प्रेम करने वाले को सताने पर ही हमारे समाज में वाह-वाही मिलती है।
सबसे पहली गजेंद्रगीरी तो उन्होंने यह की कि वकील बाबू को वित्तमंत्री बना दिया। कच्चे तेल और सोने के दाम इंटरनेशनल मार्केट में जमीन पर हैं। जेटली से पहले शायद ही किसी वित्तमंत्री को इतना अनुकूल आर्थिक ट्रेंड मिला हो। मगर जनाब जानते ही नहीं कि उन्हें क्या क्या फैसले करने हैं कि देश को इस अवसर का भरपूर लाभ मिले। अपनी इस अज्ञानता की कुढ़न RBI गवर्नर पर निकाल रहे हैं। गवर्नर इशारों में समझा रहे हैं कि क्या करना है। मगर समझ हो तो समझें।
जेटली को वित्तमंत्री बनाकर मोदी जी न सिर्फ जनता बल्कि पूरे देश से बदला लिया है। सबसे अनुकूल माहोल हम गंवा रहे हैं।
जिस सेनापति को फौज संभालने और देश की सुरक्षा संबंधी सारी जानकारियां हैं उन्हें खुड्डे लाइन लगाकर सबसे शरीफ माने जाते नेता को रक्षामंत्रालय सौंप दिया। पाकिस्तान रह रहकर आंखें दिखा रहा है और जनाब अपने शराफत के खोल से ही बहार नहीं आ रहे। जब समझ न आए कि क्या करना है तब आदमी सबसे शरीफ नजर आता है।
मोदी जी की गजेंद्रगीरी के इतने उदाहरण है कि लिखने बैठो तो किताब भर जाए। सब आपके सामने हैं। इसलिए थोड़े लिखे को ज्यादा समझना।