Thursday, February 17, 2011

श्रीलंका जीतेगा वर्ल्डकप

ज्योतिष के आधारभूत तथ्य वैग्यानिक दृष्टि से सही हैं इसमें शक नहीं, मगर इसके फलादेश वाले हिस्से को लेकर मुझे हमेशा शक रहा है। मुझे लगता है कि इसके फलादेश वाला हिस्सा सिर्फ संभावना पर आधारित है, इसलिए गोचर, दशा, अंतरदशा, नवमांश, दशांश और न जाने कहां तक बात को खींच कर गोटी बैठाने की बात की जाती है। वैग्यानिक आधार पर हम ग्रहों के प्रभाव को ही लेते हैं जो राशियों के मुताबिक होता है। उस आधार पर यहां वर्ल्डकप में भाग ले रही टीमों की राशि और मौजूदा गोचर के हिसाब से आकलन करेंगे, और वर्ल्डकप के नतीजे अगर उस अनुरूप रहते हैं तो मैं भी मानने लगूंगा कि ज्योतिष का फलादेश वाला भाग भी वैग्यानिक तथ्य है।
सबसे पहले हम मेष राशि को लेते हैं। इसमें अश्वनी, भरणी और कृतिका नक्षत्र का प्रथम चरण आता है। इस राशि में अस्ट्रेलिया और आयरलैंड की टीमें आती हैं। मेष राशि का स्वामी मंगल है। यह गोचर में फिल्हाल लाभ भाव में पंचमेश सूर्य के साथ बड़े लाभ के योग बना रहा है मगर यह स्थिति सिर्फ पंद्रह मार्च तक ही रहेगी। मंगल का खेल से सीधा रिश्ता है। इन तीनों ही टीमों का नाम कृतिका नक्षत्र का है। ऐसे में मंगल और सूर्य का योग ऐसा ही है जैसा राजा और सेनापती का।  अगर पंद्रह मार्च तक के मैचों में आयरलैंड  उल्टफेर करती हैं तो मान लेना कि ज्योतिष कुछ हद तक सही है। अगर ये दोनों टीमें आसानी से हारती हैं तो मेरी तरह शक करना। पंद्रह मार्च के बाद लग्नेश खुद व्यय भाव में चला जाएगा। वहां गुरु का साथ तो होगा मगर लग्नेश और पंचम दोनों व्यय भाव में जाकर क्या कमाएंगे। इसलिए अगर आस्ट्रेलिया सहित ये टीमें अगर फाइनल में नहीं पहुंचती हैं तो ज्योतिष को सही समझना वर्ना मेरी तरह शक करना। 


वृष राशि में इंडिया, इंग्लैंड, वेस्ट इंडीज और बांग्लादेश आते है। अब इस राशि का हाल सुनो। भाग्येश शनि वक्री चल रहे हैं। यानी भाग्येश ही उल्टी चाल चल रहा है।  पांचवे स्थान में जो प्रतियोगिता का भी होता है शनि की उल्टी चाल बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती। उस पर गुरु की दृष्टि अगर मदद करदे तो ठीक है। मेष राशि के खिलाफ तो वे भी मदद नहीं करेंगे। स्वराशि के गुरु मेष की ही मदद करेंगे, क्योंकि वे उसके भाग्येश हैं। अगर आस्ट्रेलिया से ये चारों देश हारें तो समझना ज्योतिष सही है नहीं तो मेरी तरह शक करना।प्रतियोगिता के फाइनल के समय पंचम भाव का स्वामी बुध व्यय भाव में होगा। इसलिए इनमें से किसी के भी फाइनल में पहुंचने और जीतने की संभावना नहीं है।
मिथुन राशि में केन्या और कनाडा हैं। इस राशि का स्वामि बुध है और मंगल उसका शत्रु होकर नवम भाव में है। ये देश छल कपट के किसी विवाद को तो जन्म दे सकते हैं मगर किसी चमत्कार की उम्मीद ज्योतिष के हिसाब से तो नहीं है। यानी दोनों टीमों का बेड़ा गर्क है। यह बात वैसे भी सबको दिख रही है। ऐसा हो भी सकता है। अगर ये टीमें उलटफेर करती हैं तो मेरी तरह शक करना।

कन्या राशि पाकिस्तान की है। इसका स्वामी भी बुध है। राशि में बैठा पंचमेश वक्री शनि बता रहा है कि इस बार यह टीम कई अन्य टीमों का गणित बिगाड़ेगी। इसके बावजूद सितारे फाइनल तक ले जाने की बात नहीं कहते।
वृश्चिक राशि से न्यूजीलैंड और नीदरलैंड हैं।  इसका स्वामी मंगल चौथे भाव में गुरु और सूर्य के साथ है। गुरु, राजा और सेनापति एक ही साथ हैं मगर युद्द का विगुल बज गया है और ये मां की गोद में जाकर बैठे हैं। खुद सुख में डूबे हैं तो राशि का भला क्या करेंगे। यदि फिरभी ये टीमें फाइनल में पहुंचे तो ज्योतिष पर शक करना।  सूर्य और गुरु की राशियों पर कोई टीम ही नहीं है। अगर इंडिया को भारत कहा जाए तो यह गुरु की धनु राशि का देश हो जाता है। तब भारत की संभावना इस वर्ल्डकप में ज्योतिष के आधार पर अच्छी हो जाएंगी मगर उसे इंडिया ही पुकार जाता है। इसलिए मंगल कुछ भी कर सकता है।

मकर राशि की टीम जिम्बाव्बे को कम मत आंकिएगा। तीसरे भाव में गुरु की भाग्य पर सीधी दृष्टि कुछ भी कर सकती है। अगर यह टीम कोई बड़ा उल्टफेर करती है तो ज्योतिष को सही समझना। भाग्य में वक्री लग्नेश शनि बता रहा है कि यह टीम इस बार अपने बारे में बनी पुरानी अवधारणा तोड़ देगी।
शनि की ही दूसरी राशि कुंभ में साउथ अफ्रीका और श्रीलंका की  राशि में मंगल और सूर्य बताते हैं कि पंद्रह मार्च तक इनके आगे कोई नहीं टिकने वाला। फाइनल मुकाबले वाले दिन राशि में शुक्र चंद्र की मौजूदगी भी बताती है कि इन टीमों पर सब मोहित हो जाएंगे। इसलिए फाइनल मुकाबला इन दोनों टीमों के बीच ही बनता है। इन दोनों में अगले अच्छरों की राशि लें तो फाइनल जीतने की संभावना श्रीलंका की है।

मेरा अनुभव और मानना है कि ज्योतिष का फलादेश भाग सिर्फ संभावना और तुक्का है टीम इंडिया जैसा खेल रही है उससे उसकी ही संभावना है। अगर टीम इंडिया जीतती है तो हो सकता है कि ज्योतिषी खिलाड़ियों की कुंडली और नवमांश, दशांश डालकर तुक्का बैठा ही दें मगर तब उसे मैं तो सच नहीं मानूंगा, टीम अपनी मेहनत से जीती और कर्म ही सब तय करता है।


Wednesday, February 9, 2011

एक लड़की जो न्यूयार्क को प्यार करती है

कोई किसीको भी प्यार कर सकता है। यह उसका व्यक्तिगत मामला ही नहीं, अधिकार भी है। मुझे भी इस पर लिखने की हिम्मत नहीं होती अगर उसके प्यार से पूरी व्यवस्था न हिल जाती और हड़कंप न मचता। उसके इस प्यार की वजह से चंडीगढ़ का डेंटल कालेज चार दिन तक ठप्प रहा और उसके प्रिंसिपल को अपना पद गंवाना पड़ा।
किस्सा पांच दिन पुराना है। डेंटल कालेज की एक छात्रा ऐसी टीशर्ट पहनकर क्लास में पहुंची, जिस पर लिखा था, आई लव एनवाई (न्यूयार्क)। प्रिंसिपल ने उसे क्लास में तो कुछ नहीं कहा, बाद में चपरासी भेजकर अपने कमरे में बुलाया। वहां कुछ और फैकेल्टी भी मौजूद थे। लड़की तब टीशर्ट पर स्वेटर डाल कर आई। प्रिंसिपल ने कहा, अब तुम डीसेंट लग रही हो मगर सुबह तुमने क्या पहना था। इस पर लड़की ने गुस्से से स्वेटर की जिप खोल कर फिर से टीशर्ट दिखा दी।
इसके बाद लड़की ने अपने पिता को फोन किया। पिता ने प्रिंसीपल की शिकायत वीसी से की। इसके बाद छात्र नेता भी आ गए और डेंटल कालेज का सारा कामकाज ठप्प हो गया। कुछ छात्र भूख हड़ताल पर बैठ गए। पांच दिन तक हंगामा चला तब प्रिंसिपल ने खुद पद छोड़कर पीजीआई जाने की बात कही। प्रिंसिपल के हटने के बाद ही मामला शांत हुआ।
ग्रीन कार्ड का मोह और न्यूयार्क से प्यार आज राष्ट्र प्रेम से ज्यादा मायने रखता है। आईलव माई इंडिया कहकर भले ही आप कुछ न कर सकें मगर न्यूयार्क से आपके प्यार का इजहार आपका रुतबा तो बढ़ा ही देता है। साठ के दशक के अंत में चीन प्रेम के ऐसे ही इजहार के चलते वामपंथियों ने भले अपनी किरकरी करवाई हो मगर अब न्यूयार्क प्रेम की ही तूती बोलती है। इसलिए अब वह लड़की रोज यह टीशर्ट पहनकर कालेज आ सकती है। वही क्यों और भी उससे प्रेरणा ले सकती हैं। हो सकता है आने वाले समय में कुछ स्कूलों की ड्रेस पर भी यही लाइन लिखी मिले।