तिलियार के तिलियर

तिलियार लेक, रोहतक, के बीच बना टापू, जहां हजारों प्रवासी पक्षियों का बसेरा है। 


पानी के कई रंग हैं। इसका सबसे खूबसूरत रंग है जीवन।

दिल्ली से दक्षिण-पश्चिम  को ओर जितनी दूरी बढ़ती है, पानी कम होता है। पानी का बहाव दिल्ली से उत्तर -पश्चिम - पूर्व में है। दिल्ली से देश के पानी की दिशा और दशा पता चलती है। इसलिए दिल्ली देश की दिशा तय करती है।

मगर दक्षिण-पश्चिम के लोगो़ं ने झीलों-नहरों और अपनी कर्मठता से तस्वीर बदली है। ये झीलें कई खूबसूरत पर्यटन केंद्र सृजित करती हैं।

ऐसा ही एक केंद्र है रोहतक की तिलियार लेक। 132 एकड़ में फैली इस झील का आकर्षण इसकी हरियाली और  अच्छी संख्या में दिखने वाले पक्षी हैं।

तिलियर पक्षी 

झील का नाम भी तिलियर पक्षी (Rosy Starling) के नाम पर है। यह मैना की प्रजाति का पक्षी है। नेस्टिंग के लिए दक्षिण से उत्तर-पश्चिम यानी पाकिस्तान और आफ्गानिस्तान की ओर जाता है।

पेड़ पर बड़ी संख्या में चमगादड़ भी उल्टे लटके दिखेंगे।

तिलियार में तिलियर दर्शन हो जाएं तो यह खास संयोग है। झील के बीच टापू के घने पेडों में हजारों प्रवासी पक्षी नेस्टिंग किए हुए हैं। सुबह शाम इनके कलरव का कोलहाल किसी पंचम सुर के संगीत से कम नहीं।

पास ही एक छोटा चिडि़याघर है। तिलियर में आप बोटिंग का आनंद ले सकते हैं।

चिडि़या और पानी जीवन की दशा और दिशा बताते हैं। इसलिए इन्हें संभाले रहें।


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