चौकीदार का स्विस एकाउंट

एक चौकीदार था। वह बहुत भूखा था।

भोजन की तलाश में वह एक बाग में गया। वहां पेड़ पर एक उद्योगपति बैठा था। उसके पास पनीर का टुकड़ा था।

पनीर का टुकड़ा देखकर चौकीदार के मुंह में लार आ गयी। उसने उद्योगपति से कहा - ये पनीर मुझे दे दे।

उद्योगपति बोला - क्यों दूं ? मुझे क्या मिलेगा?

चौकीदार ने कहा - मैं चौकीदार हूं। यह देश मेरे ही भरोसे चलता है। तुम कल बैंक आना और जितना पैसा चाहे विदेश भेज देना। उसका बीस परसेंट मेरे स्विस एकाउंट मेंं भी डाल देना।

उद्योगपति ने आश्चर्य से पूछा - चौकीदार! तुम्हारा स्विस बैंक में एकाउंट है?

चौकीदार ने कहा - मैं जहां सास बहू देखता हूं, उसके दूसरे, तीसरे और चौथे पति के नाम से जितनेभी एकाउंट हैं, वे सब मेरे ही हैं।

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अगले दिन तय समय पर उद्योगपति बैंक पहुंचा। चौकीदार उसके पास जाकर पीठकर खडा़ हो गया। उद्योगपति एक हाथ से चौकीदार की पीठ सहलाता रहा और दूसरे हाथ से पैसा अपने एकाउंट में ट्रांसफर करता रहा।

चौकीदार हर आने जाने वाले से मुसकरा कर कहता- उद्योगपति के साथ खडा़ होने से मैं हिचकता नहीं। गांधी जी भी उद्योगपति के साथ थे।

पूरा बैंक खाली हुआ तो उद्योगपति विदेश उड़ गया।

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स्विस बैंक ने सालाना रिपोर्ट जारी की कि इस साल सास बहू के पतियों का पैसा दोगुना हो गया है।

हंगामा मचा तो चौकीदार ने अपने जमूरे को खडा़कर पूछा- बता तो जमूरे स्विस बैंक में पैसा बढा़ या कम हुआ?

जमूरा- हुजूर कम हुआ।

हिजडो़ ने खुश होकर ताली पीटी और समवेत स्वर में गाने लगे- सजी रहे चौकीदार तेरी मां सुनहरी गोटे में।

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