संघ को पहला बौद्धिक टीका

भागवत के बचकाने उबाऊ भाषण के बाद प्रणब की बौद्धिक घुट्टी संघियों को एंटी सांप्रदायिकता का पहला टीका थी।
देश के तमाम सांप्रदायिक संगठन अगर हर महीने स्वेच्छा से एक ऐसा बौद्धिक टीका लें तो देश में सांप्रदायिकता को जड़ से मिटाया जा सकता है।

इस पुनीत काम को बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। अगले माह सीताराम येचुरी को संघ मुख्यालय बुलाकर स्वयंसेवकों का बौद्धिक टीकाकरण करवाया जाना चाहिए।

प्रणब, येचुरी, रघुराम राजन, जावेद अख्तर और मनमोहन सिंह ,   अगर इन पांच बौद्धिक टीकों से अगले पांच माह में संघियों का वैक्सिनेशन भागवत करा देते हैं तो यह संघ की ओर से देशभक्ति का पहला बडा़ काम होगा।

संघ की देखा देखी पनपे ओवेसी टाइप के नेताओं को भी अपने समर्थकों के साथ ये पांच बौद्धिक टीके लेने की शुरुआत तत्काल करनी चाहिए।

मोदी जी ऐसे टीकाकरणों से ही देश नफरत और सांप्रदायिकता से मुक्त होकर विकास पथ पर बढे़गा। मेरी मानो तो आप भी इन बौद्धिक टीकों का नियमित श्रवण करें तो गाडी़ के नीचे पिल्ला आने जैसे दूषित विचार आपके मन में नहीं आएंगे।

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