नकली कमल का नकली राष्ट्रवाद

असली और नकली में हमेशा फर्क होता है। मगर नक्काल किस्म के लोग बाखूबी अपना नकली समान बेच लेते हैं।

 नक्काल किस्म के लोग बेहद बातूनी होते हैं। खूब बडी़ बड़ी बातें करते हैं। उनकी जुबान से सौ सौ जुमले झड़ते हैं और अपनी घटिया चीज आसानी से ग्राहक को अच्छी बताकर बेच देते हैं। हालांकि असली और नकली के रंग रूप में काफी अंतर होता है मगर लोग बातों से सम्मोहित हो जाते हैं।

असली कमल गुलाबी रंग का होता है। सफेद रंग की कमल जैसी ही कुमुदनी होती है। कमल दिन में खिलता है तो कुमुदनी रात में। सवेरे सवेरे दोनों खिले मिलते हैं। वैसे लाल, नीले और पीले भी कमल जैसे फूल होते हैं, जिन्हें कमलनी या वाटर लिलि कहा जाता है।

मगर भगवा रंग का कोई कमल नहीं होता। कमल तो छोडि़ए कुमुदनी या कमलनी भी भगवा रंग की नहीं होती। भगवा कमल एक नकली कमल है झंडे-झंडियों या पोस्टर बैनर पर ही दिखता है।

गुलाबी रंग स्त्री सशक्तीकरण का प्रतीक है। सनातन संस्कृति ने इसे समझा था। इसलिए धन की देवी लक्ष्मी को इसका आसन दिया गया है।

यह गुलाबी कमल ही हमारा राष्ट्रीय पुष्य है।  इसका अर्थ है कि भारत स्त्री सशक्तीकरण का पक्षधर है। प्रधानमंत्री से राष्ट्रपति तक स्त्री यहां सर्वोच्च रही है।

मगर अब गुलाबी कमल की जगह नकली भगवा कमल को राष्ट्रीयता का प्रतीक बताया जा रहा है। इसके अनुयायी रेप को छोटी मोटी घटना मानते हैं। पार्कों में बच्चियों को पीटते हैं। नकली कमल अपने नकली राष्ट्रवाद और नकली हिंदुत्व से देश को मूर्ख बना रहा है। 

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