पाप का समंदर

पाप से भरा
समंदर है
मछली तेरे
अंदर है
नेताओं का
कूकर है
कीचड़ में लोटा
सूकर है
ऐसा ढोंगी
बाबा है
कसाई का कोई
ढाबा है

खुद को कहता
दाती है
शर्म न तुझको
आती है
कर्म ग्लानि से
भरा हुआ
धर्म हानि से
डरा हुआ
बच्ची रो रो
करे पुकार
लेकिन तू
बनता होशियार
नेता तेरा
पिल्ला है
करेक्टर का
ढिल्ला है
तेरा रक्षक
बना हुआ
कर कर योगा
तना हुआ

तू पाखंडी
भोगी है
सभ्य समाज में
रोगी है
घडा़ पाप
का फूटेगा
तेरा भ्रम
अब टूटेगा
उठा समय का
बंदर है
पाप से भरा
समंदर है
मछली तेरे
अंदर है
#सुधीर_राघव

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