मुर्दा देह में जिंदा नेता

गर्मी हवा में नहीं होती
गर्मी पानी में नहीं होती
गर्मी मिट्टी में नहीं होती
धूप में भी उतनी गर्मी नहीं होती
जितनी गर्मी खून में होती है

गर्मी चांद में नहीं होती
गर्मी तारों में नहीं होती
आसमान में नहीं होती
सूरज में भी उतनी गर्मी नहीं होती
जितनी गर्मी खून में होती है

हकीम की पुडि़या
किसी वैद्य का काढा़
खून की गर्मी नहीं निकाल सकते
बर्फ सी ठंडी चोटियों पर झंडा थामे
खून गर्म ही रहता है

साइबेरियन हवाएं खून नहीं जमातीं
खून तब जमता है
जब आदमी
आदमी नहीं रहता
हो जाता है आदमखोर
इंसानीयत जब मरने लगती है
जब पाप को देखकर मूंद लेता है आंखें
कैंची की तरह चलने वाली जुबान
पुल तले दबी लाशों को देख खामोश हो जाती है
कोई जुलूस हाथ में तलवारें और त्रिशूल लिए आता है
हत्यारों के साथ बैठकर
जब जीत का जश्न मनाता है
खून तब ठंडा पड़ जाता है

ऐसी मुर्दा देह में जिंदा नेता
सबसे खतरनाक होता है।
#सुधीर_राघव

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