घुटने में ठाकुर बुद्धि

ठाकुर की बुद्धि घुटने में होती है, यह बात अब जाकर हमारी समझ में आई है। लोगों कि सिर दर्द होता है। हमारे कभी सिर दर्द नहीं हुआ।

हमेशा घुटने और पांव में ही दर्द रहता है। सब सिर दबवाते हैं। बिना पांव दबवाए हमें नींद नहीं आती। हमें कभी सिर दबवाने की जरूरत नहीं पडी़!

हमारे नवजात बच्चों तक में बुद्धि घुटने में होने के लक्षण दिखते हैं। सिर सहलाने पर सबके बच्चे सो जाते हैं पर हमारे बच्चे पांव दबाने पर ही सोते हैं। नहीं तो हाथ-पांव चलाते रहते हैं।

आज जब बीवी ने कहा कि पेर में दर्द रहता है तो डाक्टर को क्यों नहीं दिखाते? यह ताना सुनकर हमने दिमाग पर जोर डाला तो पाया कि हम जब भी दिमाग पर जोर डालते हैं तो पांव में दर्द बढ़ जाता है। तब जाकर यह भान हुआ कि ठाकुर की बुद्धि घुटने में होती है।

वीपी सिंह के कारनामों के जमाने से लेकर योगी जी के तौर तरीकों तक हमारे यार दोस्त घुटने में बुद्धि का ताना देते थे तो हम हमेशा गुस्सा हो जाते थे। जवानी के शुरू के दिनों में एकाध को तो घुटने के नीचे दबाकर बौद्धिक बल भी ट्रांसफ्यूज किया। पर ठाकुर बुद्धि कभी अपनी बुद्धि की सही लोकेशन नहीं समझ सकी।

किसी बहूरूपीये ने कहा-जय भवानी तो हम जय भवानी करते हुए उसके पीछे हो लिए। किसी ने कहा-ठाकुर साहब जय श्री राम बोलिए तो तुम्हारे राम का मंदिर बन जाएगा। हमने जय जय कर देश के कान फाड़ दिए और यह समझने में 30 साल लगा दिए कि मंदिर पर फैसला सुप्रीम कोर्ट ही करेगा।

एक घोटालेबाज रसिक मिजाज डालमिया ने शिगूफा छोडा़ कि गौरक्षा हमारा कर्तव्य है तो ठाकुरों ने सबसे आगे बढ़कर लठ उठाया। जबरन लोगों को गोमूत्र पिलाया। इस चक्कर बहुत से ठाकुर जेलों में घुटने घिसने को मजबूर हुए और धूर्त लोग चंदा बटोरकर गोशाला में गायें मारते रहे।

यह सब देखकर भी कभी हमारे सिर में दर्द न हुआ। सिर्फ घुटने में दर्द रहता है। अब तो हाल यह है कि बडे़ बडे़ नामी प्रोड्यूसर और डायरेक्टर भी अपनी फिल्म हिट कराने के लिए ठाकुरों का घुटना इस्तेमाल करते हैं।

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