बाबा अंधा बटेर सयानी

बाबा अंधा
बटेर सयानी
हुए शर्म से
पानी पानी

सुनो सुनाऊं
एक कहानी
बुड्ढे को थी
चढी़ जवानी

आव न देखा
ताव न देखा
करता रहा
खुली मनमानी
नेता उसके
पांव पखारें
वो यौवन की
वाट निहारे
राम राम का
नाम उचारे
मगर देह में
काम पुकारे

कन्या रूप में
दुर्गा आई
पहचान सका न
आताताई
जैसे ही की
उसने नादानी
याद दिला दी
उसको नानी
लोहे का
पिंजरा मंगवाकर
बांध दिया
सबक सिखाकर
फूट फूटकर
रोये अज्ञानी
बाबा अंधा
बटेर सयानी
हुए शर्म से
पानी पानी
#सुधीर #राघव

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