ब्रह्मावर्त से ब्रह्मावाला और फिर अंबाला बना



सरस्वतीदृषद्वत्योर्देवनद्योर्यदन्तरम्।
त देवनिर्मितं देशं ब्रह्मावर्त प्रचक्षते।।17।।
(मनुस्मृति, द्वितीय अध्याय)
सरस्वती और दृषद्वती इन देव नदियों के मध्य में जो देश है देवताओं से बनाया गया है उसको ब्रह्मवर्त कहते हैं।

कुरुक्षेत्रं च मत्स्याश्च पञ्चाला: शूरसेनका:।
एष ब्रह्मर्षिदेशो वै ब्रह्मावर्तादन्तर:।।19।।
(मनुस्मृति, द्वितीय अध्याय)

कुरुक्षेत्र और मत्स्य देश, पञ्चाल और शूरसेनक ये ब्रह्मर्षि देश हैं जो ब्रह्मावर्त से समीप हैं।

मनुस्मृति के दूसरे अध्याय में सरस्वती नदी और इसकी स्थिति का स्पष्ट वर्णन मिलता है। सरस्वती और दृषद्वती (चौतांग नदी) बर्ह्मावर्त के दोनों और बहती हैं। यह देश कुरुक्षेत्र के पास है। अर्थात घग्गर और चौतांग के बीच बसे अंबाला के क्षेत्र को ही वैदिक काल में ब्रह्मावर्त कहा गया।

क्या ब्रह्मावर्त शब्द ही अपभ्रंश होकर ब्रह्मावाला और कालांतर में अंबाला हुआ? क्या घग्गर ही सरस्वती है? इन सवालों पर चर्चा अगले लेख में। (क्रमश:)

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