देवताओं के युद्ध में छुपा नदियों का इतिहास

देवताओं की लडा़इयों की कथायें इतिहास का संकेत भी देती हैं। गंगा नदी का इतिहास दो संस्कृतियों की  ऐसी ही कथाओं में छुपा है।

चीनी धर्मकथाओं के अनुसार गोंगौंग बाढ़ और तबाही मचाने वाला देवता था। जिसे अग्नि का देवता झूरोंग युद्ध में हरा देता है। हारे हुए गोंगौंग को स्वर्ग से नीचे फेंक दिया जाता है। हार से गुस्साया गोंगौंग अपना सिर बुझऊ पर्वत में मारता है। पर्वत गिरने लगता है। धरती दक्षिण - पूर्व की ओर खिसकने (गंगा चीन के दक्षिण पूर्व दिशा में ही बहती है) लगती है। देवी नुवा विशाल कछुए की टांग काटकर गिरते पर्वत के नीचे लगाकर उसे गिरने से बचाती है। बाढ़ थम जाती है मगर चीन में नदी, चांद और तारों की दिशा बदल जाती है।

इस कथा में गौंगोग के सहायक देवता जियांगलियू का भी जिक्र है, जिसका शरीर सांप जैसा है और नौ सिर हैं।

गोंगौंग और गंगा अवतरण कथाएं एक ही जलधारा के लिए हुए संघर्ष का दो अलग-अलग पक्षों और संस्कृतियों द्वारा दिया गया विवरण लगती है, जिनके किरदारों में आश्चर्यजनक ढंग से समानता है।

चीनी कथा में अग्नि के देवता झूरोंग युद्ध में जीतते हैं तो दूसरी ओर भारतीय कथाओं में सगर के 60 हजार पुत्रों को जलाकर भस्म करने का जिक्र है। हमारी कथाओं में विष्णु की मौजूदगी भी दिखाई गयी है तो चीनी कथा में नौ सिर वाले सर्पाकार देवता जियांगलियु का जिक्र है, जिसका विवरण शेषनाग से मिलता जुलता है।

क्या बुझऊ पर्वत ही गोमुख पर्वत है? जो नीचे से कच्छप आकार में उठा है और इस वजह से पर्वत के नीचे बनी सुरंग से रिसकर कैलाश मानसरोवर का पानी आता है? यह रिसर्च का विषय है। गंगा में कैलाश का पानी होने पर रिसर्च का एक काम उमा भारती ने मंत्री रहते हुये देश के भूवैज्ञानिकों को सौंपा भी था। नतीजे का इंतजार करना चाहिए। (-क्रमश:)


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