सगर के पुत्रों ने नदी (सरिता) की तलाश में जमीन खोदी थी या घोड़े (सर्ता) की तलाश में

क्या कोई घोड़े की तलाश में जमीन खोदेगा?

क्या महाभारत में व्यास ने वाल्मीकि का जिक्र किया है? क्या वाल्मीकि रामायण में व्यास का जिक्र है?

इसी तरह दोनों ग्रंथों में एक दूसरे के महानायकों का जिक्र क्यों नहीं है, जबकि दोनों ही समस्त धरा के नायक हैं? कम से कम किसी एक में दोनों का जिक्र होता तो काल निर्धारण में आसानी होती? वैसे वशिष्ठ-, हनुमान,  इंद्र, विष्णु,  शिव, ब्रह्मा आदि दोनों में हैं?

क्या सगर और  कुरू के पिता संवरण समकालीन थे? क्या भीम और भगीरथ एक ही थे?

रामायण, महाभारत, अलग-अलग पुराणों और जैन ग्रंथों में गंगा अवतरण की कथा इतनी अलग अलग है कि यह कथा अलग संस्कृतियों और अलग कालखंडों में अलगरूप लेती दिखती है।

मगर अधिकांश में सगर के 60 हजार पुत्रों द्वारा अश्व की तलाश में धरती खोदे जाने का जिक्र है।

ये साठ हजार पुत्र घोड़े को देख लेते हैं मगर ला नहीं पाते। किसी कथा मे कपिल मुनि और किसी में विष्णु जी द्वारा सभी पुत्रों को भस्म करने का विवरण हैं। उसके बाद सगर, उनके पौत्र अंशुमान, राज दिलीप बारी बारी गंगा लाने जाते हैं और भगीरथ को इसमें सफलता मिलती है।

घोड़े की तलाश में सगर पुत्रों द्वारा जमीन की खुदाई से स्पष्ट है प्राचीन घटना का उल्लेख करते समय बाहर से आये लोगों ने अश्व शब्द का इस्तेमाल मूल लोगों की भाषा को समझने में गलतफहमी की वजह से किया।

घोडे़ के लिए एक प्राचीन शब्द सर्ता  है और नदी के लिए सरिता। जाहिर है सगर के पु्त्रों ने सरिता(नदी)  लाने के लिए धरती खोदी होगी न कि सर्ता यानी अश्व की तलाश में?
असल में यह कथा पानी लाने के लिए हुई पहली और लंबी लडाई का भी प्रतीक है। जिसमें सगर के साठ हजार लोग मार दिये गये थे।

क्या अलग समुदायों में अलग भाषा की वजह से पैदा हुई गलतफहमियों की वजह से एक ही कथा अलग अलग रूप में लिखी गयी। लेखकों की कल्पना ने इस भिन्नता को और बढा़या।

तो क्या सरस्वती नदी भी ऐसी ही भाषाई गलतफहमियों की वजह से लुप्त मान ली गयी? (क्रमशः)

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