बली का बकरा बनते हरियाणा के किसान

अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य अभियानों से मध्य और दक्षिण एशिया में पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचा है उसके लिए हरियाणा के किसानों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

सेंट्रल पोलुशन कंट्रोल बोर्ड की एयर लैब ने जांच में पाया कि अफगान नमक दिल्ली की हवा को दूषित कर रहा है।

दिल्ली में स्मोग का कारण बने PM-2.5 के उच्चस्तर की एक वजह अफगान नमक है। इसकी मात्रा हवा में 11 फीसदी तक है। नमक से हवा में सघनन (condensation)  होता है और स्मोग छा जाता है।

फिलहाल यह रिपोर्ट रद्दी की टोकरी में है और सारी सरकारी  तवज्जो पिछले साल की नासा की उस रिपोर्ट को है, जिसमें स्मोग की वजह हरियाणा और पंजाब के खेतों में जलाई जाती पराली को बताया गया। नास और अमेरिकी सरकार द्वारा पराली जलने की घटनाओं की पूरी सेटेलाइट जानकारी भारत और हरियाणा सरकार को मुहैया कराई जा रही है।

नासा की रिपोर्ट ने हरियाणा के किसानों को खलनायक बना दिया। सरकार ने उन पर FIR करवाई। मोटे जुर्माने वसूले। हलांकि मनमोहन सरकार के समय से ही अमेरिका सेटेलाइट रिपोर्ट भारत को दे रहा था मगर इस रिपोर्ट की अंधभक्ति कर किसानों पर इस साल जितने बडे़ पैमाने पर  कार्रवाई हुई वह अभूतपूर्व है।

अब कयी सवाल उठते हैं। अफगान खदानों का नमक दिल्ली तक कैसे पहुंच रहा है? क्या इसकी वजह एक दशक तक अफगानिस्तान में हुई अमेरिकी कार्पेट बमिंग है? अमेरिकी बमों से नमक की काफी मात्रा हवा में मौजूद है और नम व ठंडे  मौसम में जब जब पश्चिमी हवा चलती है तो यह भारत, चीन, पाकिस्तान के शहरों में स्मोग का कहर बरपाती है।

सिर्फ चाय बेचने भर की योग्यता रखने वाले नेताओं के लिए यह समझना मुश्किल है कि पराली से ज्यादा प्रदूषण अमेरिकी बम फैलाते हैं। 

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