भगवान कृष्ण का जीएसटी पर अर्जुन को ज्ञान

अर्जुन उवाच :  हे मधुसूदन! ये गब्बर सिंह टैक्स क्या है? इसका नाम सुनते ही मेरे हाथ व्यापारियों की तरह कांप रहे हैं। मुझे कर्म का फल भी नहीं मिल रहा। मेरी बुद्धि भी स्थिल और क्षीण हो गयी है। सीए और वकील हड़ताल पर हैं।

कृष्ण उवाच : हे पार्थ! इस राष्ट्र को तू ठाकुर जान। राष्ट्र ही सबका अराध्य है। अर्थव्यवस्था इसके दोनों हाथ हैं। शाह को तू सांभा जान और गड़ककरी को कालिया। जयटली को तू महबूबा महबूबा वाला जान जो बिना सुर ताल गुलशन में गु खिलाने का ठेका संभाल रहा है। पब्लिक की स्मृति यानी अच्छेदीन की यादें बेसुरी ताल पर बेताल नाच रही है।

हे कौंतेय! साइकिल वाला अच्छा लड़का ही रहीम चाचा का रामगढ़ वाला बेटा है। जिसे गब्बर ने हराकर पूरे कुनबे में फूट डाल दी। ये माया ही मौसी है। कलकत्ते की हे मा ही वह बसंती है, जिसकी जुबान चलती है तो गब्बर और सांभा की अक्ल काम करना बंद कर देती है। रघुराम राजन वह वीरू है जिसके सटीक निशाने से आम झड़ते हैं। मनमोहन को ही जय जान जिसे रेनकोट में कैदकर बसंती को नचाने की कोशिश की गयी।

हे अर्जुन! नोटबंदी और जीएसटी को तू गब्बर की वे दो तलवारें जान,  जिनसे ठाकुर के हाथ काटे गये। इन तलवारों को ही तू गब्बर सिंह टैक्स जान।

Comments