सिर्फ सुखना ही नहीं पूरे देश में फैल रहा यह खतरा

जूलोजिकल सर्वे आफ इंडिया (ZSI) एक नये खतरे से देश को चेताया है।
157 विदेशी जंतु प्रजातियां (इनवेसिव) हमारे देसी फ्लोरा-फोना के लिए खतरा बन गई हैं।

ZSI की ओर से पहली बार इस तरह की रिपोर्ट तैयार की गयी है। इन 157 प्रजातियों में से 58 जमीन पर और 99 जलीय हैं। ( द हिंदू, संडे स्पेशल रिपोर्ट)

हिंदू की इस रिपोर्ट के संदर्भ में चंडीगढ़ की सुखना झील का संकट बनी एक जलीय बूटी का जिक्र करना चाहूंगा। 2009 में पहली बार इसकीजानकारी मिली। हिंदुस्तान में हमारे संवाददाता अश्वनी कुमार अपनी खास घुमक्कडी़ की आदत की वजह से इसे ब्रेक करने में सफल रहे।

एक्वेटिक वीड के बारे में हमारे वनस्पति शास्त्रियों का अध्ययन किस स्तर पर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगले तीन दिनों में उस बूटी के चार नाम बता दिए गये। तब अश्वनी ने एक और काम किया वह बूटी पालिथीन में डाल कर ले आये और मैंने उसकी पत्तियां तने और कांटे स्केल से नाप और उनकी संख्या तथा आकार के विवरण की उन चारों बूटियों सेतुलना करते हुए रिपोर्ट छापी। यकीन मानें इस बूटी का विवरण उन चारों में से किसी से नहीं मिलता था। (मेरा ब्लाग भी देख सकते हैं) उसके बाद सुखना के हाइड्रोलिक सर्वे का काम रुड़की को सौंप दिया गया।

रुड़की की रिपोर्ट में सुखना को कयी तरह की बूटियों से खतरा बताया गया। बचाने के कयी सुझाव भी दिए गये मगर सबसे ज्यादा खतरा बनी बूटी की पहचान स्पष्ट नहीं थी। 2015 में मैं और अमर उजाला के वरिष्ठ तथा जोशीले संवाददाता आशीष वर्मा ने सुखना से उखाडी़ जा रही बूटी के सैंपल लिए और सीधे पीयू के बॉटनी विभाग पहुंच गये। प्रोफेसर साहब ने दो दिन का समय मांगा और दो दिन बाद सचमुच फोटो और कैरिकेचर तथा विवरण के साथ फाइल भेज दी। बूटी का नाम है नाजस मैरीना। सुखना के लिए  एक इनवेसिव इक्वेटिक वीड।

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