रघु की कामधेनु और मोदी की गाय

मोदी सरकार के एक फैसले ने देश को करीब दो लाख करोड़ की बड़ी चपत लगाई है।

पिछले साल 8 नवंबर को आनन फानन में नोटबंदी की घोषणा  की गईं थी।

प्रसिद्ध  अर्थशास्त्री और RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का आकलन है कि बिना तैयारी लागू किए इस फैसले ने देश की GDP को 1 % से 2%  के बीच नुकसान पहुंचाया ।

राजन ने पिछले साल सितंबर में गवर्नर का पद छोड़ा था। उनके अनुसार तब तक RBI को नोटबंदी की तैयारी के लिए सरकार की ओर से कोई निर्देश नहीं दिया गया था।

हाल ही में एक इंटरव्यू में राजन ने कहा है कि उन्होंने सरकार को नोटबंदी के नुकसान के बारे में चेतावनी दी थी। साथ ही कालाधन की समस्या को खत्म करने के लिए विकल्प सुझाये थे।

अपनी किताब आई डू व्हाट आई डू: अॉन रिफोर्मस रेहटोरिक एंड रिसोल्व में भी कहा है कि उन्होंने फरवरी 2016 में ही सरकार को यह लिखित सुझाव दे दिया था कि कालाधन खत्म करने के लिए क्या क्या कदम उठाये जा सकते हैं।

मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को भी चाय बनाने जैसा आसान काम समझा और बिना तैयारी नोटबंदी लागूकर देश को न सिर्फ पीछे धकेला बल्कि गरीबों को कतारों में मरने को विवश किया। GDP विकास दर गिरकर 5.7   फीसदी पर आ गयी है। सरकार के माथे पर सौ से ज्यादा लोगों की हत्या का कलंक भी।

इतना गंवाकर भी नोटबंदी का कोई फायदा नहीं हुआ। कालाधन और बढ़ गया है। फोर्ब्स की सूची बता रही है कि भ्रष्टाचार में हम एशिया में नंबर वन हो गये हैं। मलेशिया और पाकिस्तान को भी पीछे छोड़ दिया है।

नोटबंदी से न कश्मीर का आतंकवाद रुका न नक्सली हमले। हम अपने अमरनाथ यात्रियों तक सुरक्षित नहीं रख पाये।

असल में नोटबंदी एक मूर्खतापूर्ण तुगलकी फरमान था जिसकी कीमत गरीब जनता और देश ने चुकायी और बडे़ घरानों के लिए यह माल कमाने का मौका साबित हुई।


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