अजब जांच की गजब कहानी

एक अजब मामले की गजब जांच हुई है। आप इसका निष्कर्ष जानेंगे तो भ्रष्टाचार की बू से नाक दबा लेंगे।

दुनिया की सबसे बड़ी हथियार कंपनी BAE Systems की अमेरिकी इकाई से जनवरी में 5 हजार 420 लाख डालर में होवित्जर तोप सौदा मोदी सरकार ने किया। मई में कंपनी ने दो तोपें ट्रायल के लिए भारत भेजीं। इनकी कीमत 35-35 करोड़ रुपये बताई गयी।

पोखरन में 2 सितंबर को इनका ट्रायल हुआ तो M777 मोडल की इन होवित्जर तोपों की नाल फट गयी। अरबों -खरबों का सौदा है। इसलिए तत्काल जांच बैठा दी गयी ।

अब जांच का जो नतीजा आया है वह चौंकाने वाला है। जांच रिपोर्ट में तोप की नाल को कमजोर नहीं बताया गया बल्कि इसमें इस्तेमाल हुए भारतीय गोलों को ही गलत बता दिया गया है।

राष्ट्रवादी सरकार की जांच का यह नतीजा न सिर्फ चौंकाने वाला है बल्कि कई सवाल भी पैदा करता है।
पहला सवाल तो यह कि जांच का यह निष्कर्ष क्या इस सौदे के पीछे किसी बड़ी कमिशनखोरी का नतीजा है?

अगर तोपों की नाल को कमजोर बता दिया जाता, जो कि ट्रायल में ही उनके फट जाने से साबित भी हुआ है,  तो यह पूरा सौदा ही संकट में पड़ जाता। ऐसे में जिनके कमिशन तय हो गये वे कैसे मिलते। क्या कमिशनखोर लोबी इतनी ताकतवर है उसने रिपोर्ट ही अटपटी बनवा दी।

वैसे भी अमेरिकी हथियार कंपनियां एशियाई देशों को जो हथियार बेचती हैं उनकी गुणवत्ता संदिग्ध ही रहती है।अमेरिकी कंपनियों के हथियारों के भरोसे पाकिस्तान 1965 और 1971 की जंग में अपनी दुर्गति करवा चुका है।

BAE systems सिर्फ 17 साल पुरानी ब्रिटिश कंपनी है, जो दो कंपनियों ब्रिटिश एयरो स्पेस और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के मर्जर से बनी है। यह अब तक हथियारों की दर्जनभर कंपनियों को लीलकर दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बन गई है।

होवित्जर तोप से क्या आपको तीस साल पुराने बोफोर्स घोटाले की याद आती है? क्या आपको पता है कि बोफोर्स कंपनी अब किस हाल में है?

बोफोर्स सौदे का सच जानने के लिए हम इतिहास में चलते हैं।   क्रमश:


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