बुलेट ट्रेन : सफेद हाथी का स्वागत

115000km लंबे रेलमार्ग वाले रेलवे का सालाना बजट ₹1.3 लाख करोड़ है।

  सिर्फ 500 km लंबे बुलेट ट्रेन ट्रेक का कुल लागत बजट  ₹1. 1 लाख करोड़ है।

देश के बाकी जरूरी खर्चों में कटौती कर बुलेट ट्रेन पर ₹20 हजार करोड़ रुपये खर्च करने के लिए सरकार ने जुटा लिए है।

रेलवे के मेंटेनेंस स्टाफ में काफी कमी आई है। पिछले तीन साल में काफी कर्मचारी रिटायर हुए हैं मगर नए नहीं रखे गये। इनमें लाइनमैन  और चाभीवाले वे जरूरी स्टाफ हैं जो नियमित रेल ट्रेक की जांच करते हैं और नट बोल्ट ढीले जैसी छोटी मोटी खामी को खुद दूर करते हैं और बड़ी खामी दिखने पर वर्क इंस्पेक्टर को सूचित करते हैं।

ऐसे स्टाफ की कमी से ट्रेक की नियमित जांच का काम प्रभावित हुआ है और आए दिन डिरेलमेंट हो रहे हैं। इस तरह सरकार लोगों की जान से खेल कर पाई पाई जोड़ रही है ताकि मुंबई से अहमदाबाद बुलेट ट्रेन चल सके।

इतना ही नहीं, बुलेट ट्रेन के लिए जापान से  0.1 फीसदी की ब्याज पर  ₹90000 करोड़ रुपये कर्ज लिया गया। इस कर्ज पर हमें हर साल जापान को 90 करोड़ रुपये ब्याज देना होगा।

रेलवे चाहे तो इस 90 करोड़ रुपये से 30 हजार लाइनमैन और चाभी वाले रख सकता है। यानी तीस हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार तो बुलेट ट्रेन के कर्ज के बदले दिए जाने वाले ब्याज से ही दिया जा सकता है। साथ ही रेलयात्रा भी सुरक्षित होगी।

90 हजार करोड़ का कर्ज हमें 15 साल में जापान को ब्याज सहित लौटाना होगा, नहीं तो ब्याज दर कई गुना बढ़ जाएगी।

बुलेट ट्रेन का स्वागत, सफेद हाथी का स्वागत है। इस तरह बुलेट ट्रेन के नाम पर देश ही बेचने की तैयारी है।

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