लाखों हिंदुओं को बेबकूफ बनाता है एक पोस्टकार्ड


वर्ष 2008 में श्याम बेनेगल की फिल्म आई थी 'वेल्कम टू सज्जनपुर'। इक्कीसवीं सदी में अप्रासंगिक हो चुकी डाक सेवा की प्रमुख कड़ी पोस्टकार्ड को यह एक विनम्र श्रद्धांजलि थी। पोस्टकार्ड, जो हमारे दुख सुख के संदेश ले जाता था, जो प्रेम और भ्रातृत्व के नए द्वार खोलता था, सचमुच खत्म हो चुका है।
मगर एक ओर पोस्टकार्ड था, जो किसी देवी देवता से जुड़े सपने के झूठ के नाम पर लिखा जाता था। यह सौ पांच सौ हिंदुओं को उल्लू बनाता था। यह वाला पोस्टकार्ड डाकसेवा के साथ मरा नहीं है, बल्कि अॉनलाइन होकर और शक्तिशाली हो गया है। यह पहले सौ पांच सौ को उल्लू बनता था तो अब एक साथ लाखों हिंदुओं को अपने झूठ से बेवकूफ बनाता है। ऐसे ही एक पोस्टकार्ड की पोल गौरी लंकेश ने अपने आखिरी संपादकीय में खोली थी। आप भी पढे़ं...

गौरी लंकेश का आखिरी संपादकीय 


इस सप्ताह के अंक में मेरे दोस्त डॉ. वासु ने गोएबल्स की तरह इंडिया में फेक न्यूज़ बनाने की फैक्टरी के बारे में लिखा है। झूठ की ऐसी फैक्टरियां ज्यादातर  मोदी भक्त ही चला रहे हैं। झूठ की फैक्टरी से जो नुकसान हो रहा है मैं उसके बारे में अपने संपादकीय में बताने का प्रयास करूंगी। अभी परसों ही गणेश चतुर्थी थी। उस दिन सोशल मीडिया में एक झूठ फैलाया गया। फैलाने वाले संघ के लोग थे।

ये झूठ क्या है? झूठ ये है कि कर्नाटक सरकार जहां बोलेगी वहीं गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करनी है, उसके पहले दस लाख रुपये जमा कराने होंगे।  मूर्ति की ऊंचाई के लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी, दूसरे धर्म के लोग जहां रहते हैं उन रास्तों से विसर्जन के लिए नहीं ले जा सकते। पटाखे वगैरह नहीं चला सकते हैं। संघ के लोगों ने इस झूठ को खूब फैलाया। यह झूठ इतना ज्यादा फैल गया कि अंत में कर्नाटक के पुलिस प्रमुख आर के दत्ता को प्रेस बुलानी पड़ी और सफाई देनी पड़ी कि सरकार ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है। ये सब झूठ है।

इस झूठ का सोर्स जब हमने पता करने की कोशिश की तो वो जाकर पहुंचा POSTCARD.NEWS नाम की वेबसाइट पर। यह वेबसाइट पक्के हिन्दुत्ववादियों की है। इसका काम हर दिन फ़ेक न्यूज़ बनाकर बनाकर सोशल मीडिया में फैलाना है। 11 अगस्त को POSTCARD.NEWS में एक हेडिंग लगाई गई, कर्नाटक में तालिबान सरकार। इस हेडिंग के सहारे राज्य भर में झूठ फैलाने की कोशिश हुई। संघ के लोग इसमें कामयाब भी हुए।

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