आप भी जानें भूत का ज्ञान और विज्ञान

स इमांल्लोकानसृजत।
अम्भो मरीचीर्मरामपोs दोsम्भ: परेण दिवं द्यौ: प्रतिष्ठाsन्तरिक्षं मरीचय:।
पृथ्वी मरो या अधास्तात्ता आप:।।2।। (ऐतरेयोपनिषद्)

अर्थात :  ईश्वर ने चार लोकों अम्भस, मरीची, मरम् और आप:  की रचना की। वह  अम्भस (सूर्य) है जो द्यौ से परे है और द्यौ ही इसका आधार है। अंतरिक्ष मरीची है। पृथ्वी मर है और जो नीचे है वह जल है।

उपनिषदों में चार लोक बताए गए हैं। पहला अम्भस अग्निपिंड का लोक है। इसे ब्रह्मलोक भी कहते हैं। आत्मा की ऊर्जा ब्रह्म की ऊर्जा में लीन होने को ही मोक्ष कहा जाता है। मुक्दूतपिंड का न वर्तमान होता है और न भूत। दूसरा लोक मरीची अर्थात अंतरिक्ष यानी देवलोक है। मरीची विचार की तरह ही अगोचर है। माना जाता है कि अच्छी आत्माएं इसी लोक में निवास करती हैं। यह विचार लोक है अच्छे लोग मरने के बाद भी विचार के रूप में इस लोक में हजारों साल रहते हैं। सभी विचार किसी भूतकाल के कर्म का फल होते हैं और हर विचार का एक भूत होता है।

तीसरे लोक को मर कहा गया है। पृथ्वी पर मृत्यु को प्राप्त होने वाले जीवों का वास है । इसलिए ही इसे भी मर कहा गया है।पृथ्वी ही मर यानी मृत्यु लोक है। यहां जो घटता है सव वर्तमान में ही घटता है। भूत और भविष्य का मृत्यु लोक में कोई काम नहीं।

चौथा लोक मृत्युलोक से भी नीचे है। जल नीचे की ओर बहता है इसलिए  इसे अप: कहा गया है। यह पताल लोक हैं। यहां किसी काल का बोध नहीं होता। एक कथा है कि राम की अंगूठी लेने जब हनुमान पाताल लोक जाते हैं तो वहां लगे अंगूठियों के ढेर में से कौन सी अंगूठी किस काल के राम की है यह बात वहां का राजा भी नहीं बता पाता।

वर्तमान काल में भूतकाल का क्या काम? इसलिए मृत्युलोक यानी धरती पर भूत का वास नहीं हो सकता। जो बीत गया वह सिर्फ विचार बनकर ही जी सकता है। इसलिए वह मरीची और भ्रम का वासी  है। पृथ्वी पर विचार मनुष्य की वाणी को अपना निवास बनाता है। इसीसे फैलता है। इसलिए भूत की बात करने से ही यह एक से दूसरे तक फैलता है।

यह तो रही धर्मग्रंथों की बात। विवेकानंद ने उपनिषदों को सबसे वैज्ञानिक और तार्किक ग्रंथ माना है।

अब हम विज्ञान और मनोविज्ञान की बात करते हैं। मनोचिकित्सकों से जानते हैं कि मनोविज्ञान में भूत क्या हैं?

चंडीगढ़ के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. प्रमोद कुमार औरपीजीआई के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर संदीप ग्रोवर के अनुसार भूत प्रेत कुछ नहीं होते। जब दिमाग के रसायनों का संतुलन बिगड़ता है तो लोग अफवाहों को सच मानकर उनके अनुरूप अनुसरण करते हैं। उत्तर भारत में फैल रहीं चोटी कटने की घटनाओं को वे मास हिस्टीरिया बताते हैं। उनके  अनुसार जिनके भी ब्रेन में डोपामाइन और सिरोटोनिन का संतुलन बिगडा़ होता है वे दूसरे के कहे में जल्दी आ जाते हैं। अफवाहों को आसानी से सच मान लेते हैं। दूसरे पीड़ित को देख उसीका अनुसरण करने लगते हैं।

इन दोनों को जानें 

डोपामाइन 

डोपामाइन एक न्यूरोट्रांसमीटर है, जो हमारी भावनात्मक गतिविधियों को नियंत्रित करता है। जिन लोगो में डोपामाइन का स्तर कम होता है वे रिस्क टेकर माने जाते हैं और खूब गलतियां करते हैं। वे किसी भी अफवाह को सुनकर उस पर अमल करने का जोखिम उठा सकते हैं।

सिरोटोनिन

इस न्यूरोट्रांसमीटर को नेचुरल मूड एस्टेबिलाइजर कहा जाता है। इसके असंतुलन से व्यक्ति  अवसादग्रस्त और चिंतित रहता है। भय फैलाने वाले किस्से और अफवाहें  उन पर ज्यादा असर करती हैं। सिरोटोनिन का स्तर कम होने से कमेच्छा बहुत बढ़ जाती है। साथियों को आकर्षित करने के लिए वह कल्पनालोक में जीने लगता है। भूत प्रेत की अजीब बातें और हरकतें करता है।







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