जाग मछंदर गोरख आया


नाथ योग‌ियों का सत्ता में ल‌िप्त होना कभी शुभ नहीं होता। मछंदर नाथ भी एक रानी के आग्रह पर राजा हुए थे। रानी से एक पुत्र भी हुआ। मछंदर के सत्ता और गृहस्थ‌ में ल‌िप्त होने पर उनके श‌िष्यों को अन्य योगी ताना देते थे। तब उनके सबसे तपी और होनहार ‌शिष्य गोरखनाथ ने गुरु को ढूंढ लाने और ताने देने वालों को सच दिखाने का फैसला ल‌िया। गोरखनाथ अलख जगाते हुए नगरी पहुंचे तो देखा उनके गुरु सच में रानी के साथ हैं और उनके एक पुत्र भी। गोरख ने गुरु को साथ ले जाने की चेष्टा की तो गुरु तो नहीं मगर उनका पुत्र गोरखनाथ के पीछे संन्यास मार्ग पर चला आया। रास्ते में ही पुत्र का न‌िधन हो गया। पुत्र का शव लेकर गोरखनाथ पुनः मछंदरनाथ के पास पहुंचे। रानी व‌िकल हो गई। पर मछंदर नाथ ने अपनी माया समेट ली और ‌फिर जंगल की ओर रवाना हो गए।

बाबा गोरखनाथ के उसी शहर में आज तीस मासूमों की मौत हुई है, यह हृदयविदारक है तो क्या मछंदर नाथ जी की माया नहीं टूटेगी...
(दंतकथा)

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