नैतिकता का नीतीश होना

सुधीर राघव





मैं और मेरी नैतिकता
अक्सर ये बातें करते हैं
मैं प्रभु होता तो
ऐसे करता
भक्त होता तो वैसे करता
कि रेल भले गिर जाए
मगर कुर्सी नहीं गिरनी चाहिए

मैं और मेरी नैतिकता
अक्सर ये बातें करते हैं
चारा घोटाला होता तो
ऐसे करता
संपूर्ण घोटाला होता तो
वैसे करता
कि नैतिकता भले नीतीश हो जाए
कुर्सी छोड़कर भी थामे रखनी चाहिए

मैं और मेरी नैतिकता
अक्सर ये बातें करते हैं
मैं चाय बेचता तो
ऐसे करता
अगर जुमले बेचता तो वैसे करता
कि अपनी पत्नी छोड़कर
दूसरों की पत्नियों की
हक की लडा़ई लड़ता।


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