दारुण भेंटली

प्रथम दक्षिणपंथी रावण के काल में क्या लंका का खूब विकास हुआ था?

अगर धर्मग्रंथों की मानें तो इसका जवाब है नहीं।

असल में एक विकसित और संपन्न लंका उसने कर्म से मनमोहन कुबेर से छीनी थी। रावण के काल में लंका का सिर्फ विनाश हुआ। पतन हुआ।

बातों का धनी रावण कुबेर का धन और सत्ता पाकर इतना मगरूर हुआ की वह दुनिया में घूम घूमकर सबसे अहंकार जताने लगा।

उसका प्रमुखमंत्री प्रहस्त दारुण भेंटली जनता को सताने के नित नये उपाय खोजा करता था। उसके नये नयेटैक्सों से जनता त्रस्त थी। जब चाहता जादू से मुद्राओं का चलन रोक देता। अगर लोग विरोध करते और कमीशन नहीं देते तो पवन दूतिका को बंधक बनाकर उनके बच्चों की सांसे रुकवा देता था।

वह लोगों के मुकदमे देखता तो उनसे बड़ी भेंट मांगता। खेलों का आयोजन करता तो भेंट लेता। इसलिए दुखी जनता उसे प्रहस्त नहीं दारुण भेंटली नाम से जानती थी।

रावण को अपने मंत्री दारुण भेंटली पर अपार श्रद्धा थी, क्योंकि वह उसका मामा भी था।

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