नगरीय सभ्यता का नया विकास माडल

बहुप्रचारित गुजरात मॉडल का आदर्श शहर अहमदाबाद भयंकर बाढ़ की चपेट में है।
पिछले बुधवार 24 घंटे में हुई 200 mm बारिश ने शहर पर कहर बरपाया। दस हजार से ज्यादा लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। हवाई अड्डे तक पानी पहुंच गया।

वर्ष 2008 में चंडीगढ़ में 24 घंटे में 300 mm से ज्यादा बारिश दर्ज की गईं थी। एकाध स्थान पर छुटपुट जलभराव के अलावा पानी कुछ घंटों में ही निकल गया था। इसके बावजूद भी आजकल चंडीगढ़ का विकास माडल गुजरात माडल के आगे प्रचार में कहीं नहीं दिखता। यहां तक कि चंडीगढ़ को इतना पिछड़ा माना गया कि देश के स्मार्ट शहरों की पहली सूची में मोदी सरकार ने चंडीगढ़ को रखा ही नहीं था। मीडिया में थू थू हुई तो अगली विशेष  सूची में चंडीगढ़ को जगह मिली।

नगरीय सभ्यता का विकास माडल कैसा हो?

गुजरात के माडल का जितना प्रचार हुआ था, उससे लगने लगा था कि देश को उसका विकास माडल मिल गया है? मगर इस बारिश ने बता दिया कि गुजरात माडल भी बलिया, छपरा, सौरों, रोहतक, भुच्चोमंडी की विकास माडल से अलग नहीं है, जो 100 -200mm बारिश में डूब जाते हैं। लोगों की जिंदगी संकट में फंस जाती है।

नर्मदा के ग्रेविटी  फ्लो को गुजरात माडल अपना कमाल मानता है। इसकी वजह से अहमदाबाद के कोटरपुर वाटर वर्क्स में रोज नर्मदा का पानी बिना बिजली खर्च किए (बिना पंपिंग)  पहुंचता है। यहां से रोज 650 mgd पानी सेडीमेंटेशन और क्लोरीनेशन के बाद शहर में पीने के लिए सप्लाई किया जाता है।

पिछले साल नवंबर में पीआईबी के टुअर में गुजरात मॉडल को जानने और समझने का सौभाग्य मिला। सरदार नगर तक नर्मदा का पानी नर्मदा के ग्रेविटी फ्लो से लाया जा रहा है। इस वाटर वर्क्स को देखना हमारे जैसे आइंजीनियरों (non-engineers) के लिए एक शानदार  अनुभव था।

मगर सवाल उठता है कि क्या देश का यह विकास माडल सिर्फ समस्याओं के फौरी समाधान की इंजीनियरिंग है। क्या भविष्य के खतरों और जरूरतों की अनदेखी की गईं है। किसी कुदरती बहाव के ग्रेविटी फ्लो की जद (वाटर लेवल से नीचे) में बसे शहर के क्या खतरे हो सकते हैं? क्या इसपर विचार किया गया? अगर विचार होता तो शायद 200mm बारिश में देश का विकास माडल एक अवैध और अनप्लांड कलोनी की तरह नहींं डूबता।

ली कर्बूजिए जैसी सोच और माडल शायद अब पुराने और बेतुके लगते हैं, जो शहर से 50 से 60 किलोमीटर दूर के दायरे तक  होने वाली बारिश के पानी की हार्वेस्टिंग के लिए पहले लेक प्लान करते हैं और फिर शहर। विकास का यह माडल 300 mm से ज्यादा बारिश भी अगस्त्य  मुनि की तरह पी जाता है और जनता कष्ट से बच जाती है। दूसरी ओर गुजरात का विकास माडल है जो हर ओर मीडिया में छाया है। देश की जनता उसकी दीवानी है और दीवानगी में कष्ट मायने नहीं रखते।

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