मंत्री का मुंह

हमारे वित्त मंत्री जी की आर्थिक मामलों पर समझ कितनी कच्ची है, वह जब भी मुंह खोलते हैं, इसका सबूत दे देते हैं।

राम जाने उन्होंने मोदी जी को क्या गिद्दड़सिंगी सुंघाई है कि चुनाव हारकर भी दो दो भारी भरकम विभागों की मलाई चाट रहे हैं।

आपको उन पुण्य केसों की वजह से जो कभी बड़े घरानों के लङे, सत्ता के स्वयंवर में ऊंची कुर्सी पर बैठा दिया है तो मौन रहकर मलाई चाटते रहो। सबसे कह दिया जाएगा मंत्री जी मौनव्रत पर हैं। इससे आर्थिक मामलों पर तुम्हारी अल्पज्ञता पर पर्दा रहेगा। देश की भी इज्जत बची रहेगी।
मगर तुम ये बीच में अचानक उष्ट्र उष्ट्र बोलने लगते हो तो कसम से बङी फजीहत होती है। गैरों को तो छोड़ भी दो, आपके अपने सुब्रमण्यम स्वामी आपसे चुटकी लेने लगते हैं।

अभी ग्रोथ रेट धङाम हुआ तो तुमने एक अंजान और नौसिखिए नेता की तरह झटसे कह दिया कि यह नोटबंदी की वजह से नहीं है। वहीं स्वामी यह कह कर तुमसे मौज ले गए कि हमने तो पिछले महीने ही पीएम को बता दिया था।
यह कहकर स्वामी ने सिर्फ तुमसे ही मौज नहीं ली बल्कि पीएम को भी बता दिया की यार तुमने किस को मंत्री बना रखा है।

असल में स्वामी ने तुमसे कहा है कि हे प्यारे! जो बात तुम्हें आज भी पता नहीं चली, वह मुझे एक माह पहले चल गई थी और मनमोहन सिंह को छह माह पहले।

जनवरी में जब मनमोहन सिंह ने कहा था कि ग्रोथ रेट में दो फीसदी की गिरावट आएगी, तब तुमने सदन में उनका मजाक उङाया था। आज हकीकत सामने है तो तुम्हारे लोग ही तुम्हारा मजाक उङा रहे हैं।

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