बिल्लियों के इश्क में

सुधीर राघव

बीवियों की बात पर इस कदर वारे गए
बिल्लियों के इश्क में लाखों चूहे मारे गए

हैं अंधेरे के मुसाफिर उजाले की तलाश में
सूरज खोया ढूंढने पूर्व की ओर तारे गए

आवाजें आजाद कब थीं मोहताज होती हैं
जिस तरफ भीड़ चली उसी तरफ नारे गए

उठते उठाए न उठी बैठी रही वह मौन
इक खुदी को छोड़कर महफिल से उठ सारे गए

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