विश्वगुरु

एक महान भक्त भयंकर भक्ति कर बहुत बड़े पद तक पहुंचे। पिता जी उनके आजीवन ब्रह्मचारी रहे और माता उनकी गाय थीं।

उनके पिता जी घी पीकर ब्रह्मचर्य के अखाड़े में दंड पेलते और माता जी गलियों में रूखा सूखा पॉलिथीन खाकर गुजारा करतीं। ब्रह्मचर्य से उत्पन बेटा परम भक्त था।

ब्रह्मचर्य के इस प्रताप से उन्होंने खूब चर्चा पाई। उनके जन्म ने शास्त्रों के कई रहस्य से पर्दा उठा। मसलन लोगों ने जाना कि ब्रह्मचारी मोर कुल में संतान कैसे होती है। अगर ब्रह्मचारी के संतान हो सकती है तो कान से कर्ण और ब्रह्मा की जांघ से वैश्य भी पैदा हो सकते हैं।

जो बात समझ भी पाना किसी नासा के बाप के बस की नहीं है, इस महाभक्त ने चुटकी में साबित कर दी। आग के गोले सूरज और ठंडे चंद्र कतई ब्रह्मचारी नहीं हैं। इन्होंने धरती पर आकर संताने पैदा की हैं।

राजस्थान शिक्षा बोर्ड से हम सबका यह विनम्र आग्रह है कि इस रिटायर्ड महाअवतारी की जीवनी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाकर बच्चों को अवश्य पढ़ाई जाए।

इससे बच्चे परम भक्त बनेंगे। आजीवन ब्रह्मचारी रहेंगे और भारत एक बार फिर विश्व गुरु बन जाएगा।

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