उधार का अधनंगा राष्ट्रवाद-6 : फ्रांस की आजादी की देवी नए राष्ट्र ढूंढ रही थी

सुधीर राघव


पिछले लेखों में हमने चर्चा की थी कि 1857 के बाद किस तरह भारत में बड़े वैचारिक बदलाव जन्म ले रहे थे। हिंदी और ह‌िंदू के रूप में एक नए तरह के राष्ट्रवाद ने अंगड़ाई लेने शुरू कर दी थी।

इस नए राष्ट्रवाद के बीज कहां से आए? खाद कहां से मिला? आज हम इस पर चर्चा करेंगे।

असल में भारत का यह राष्ट्रवाद यूरोप में सौ साल पहले जन्मे राष्ट्रवाद की नकल था। अंग्रेजी कालेजों से  पढ़कर निकल रहे युवा यूरोप में हुई क्रांत‌ियों से खासा प्रभावित हुए। खासकर फ्रांस में हुई क्रांत‌ियों से। जो अंग्रेज युवा कंपनी के अफसर बनकर भारत आ रहे थे, वे भी अपने जहन में इसके बीज सहेज कर लाए।

प‌ितातुल्य माने जाते राष्ट्र को माता मानने का विचार भी दुनिया में फ्रांस ने ही लोकप्र‌िय बनाया। मैराइने फ्रांस गणराज्य का राष्ट्रीय च‌िन्ह हैं और इसे गोडेस ऑफ लिब्रटी कहा जाता है। आजादी की देवी।
इत‌‌िहासकार मौरिस अगुलोहं मानते हैं कि इसके पीछे विचार यह था कि फ्रांच गणराज्य में मह‌िलाओं को भी प्रत‌िनिधित्व देने की मानस‌िकता का न‌िर्माण हो।

1775 में जीन माइकल मोरयू ने एक युवा मह‌िला की तस्वीर बनाई थी, जो रोमन स्टाइल के कपड़े पहने और फरिज‌ियन कैप लगाए थी। 1789 में फ्रेंच क्रांत‌ि के दौरान इस आजादी की देवी का विचार फ्रांस में नए राष्ट्रवाद और आजादी का प्रतीक बना। क्रांत‌ि के बाद 1792 की पहली नेशनल कन्वेंशन इसे राष्ट्र का प्रतीक माना गया मगर इस देवी की तस्वीर खड़ी मुद्रा में कर दी गई, जिसके हाथ में एक भाला था। अगले ही साल इसे बदलकर और आक्रामक तस्वीर को मान्यता दी गई, जिसमें  देवी स्तन उघाड़े आग उगलते चेहरे के साथ युद्ध में लोगों का नेतृत्व कर रही थी। यह राष्ट्रवाद को कट्टर रूप देने के लिए थी। यह विदेश‌ियों और गैर फ्रांसस‌ियों के प्रत‌ि कठोर और उग्र रुख अपनाने का आह्वान थी।

फ्रांस में दैवी की इस तस्वीर को सौम्य होने में पचपन साल लगे। 1848 में सैकेंड रिपब्ल‌िकन के समय यह तस्वीर उदार रूप की हो गई। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद राष्ट्रवाद और देवी का क्रेज फ्रांस में तेजी से कम होना शुरू हुआ और राष्ट्रवाद की जगह विकासपरक विचारों ने ले ली।

फ्रांस से देवी का व‌िचार जर्मनी में भी खूब लोकप्र‌िय हुआ। वहां 1848-49 में मदर जर्मेन‌िया आस्त‌ित्व में आई। पहली तस्वीर फिल‌िप बेल्ट ने कपड़े के बेनर पर बनाई थी। यह तस्वीर एक लाल खुले बालों वाली मह‌िला की थी। उसके एक हाथ में तलवार थी, जिसे पकड़कर वह मध्ययुग के शासकों के अंदाज में खड़ी थी।

यह वही दौर था जब यूरोप के दोनों बड़े देश राष्ट्रवाद का माता-माता खेल खेल रहे थे और अलग-थलग कौने में पड़ा एक प‌िछड़ा समझा जाने वाला देश इंग्लैंड नई आर्थ‌िक और सैन्य क्रांत‌ियों के खांचे गढ़कर दुन‌िया की सर्वोच्च ताकत बनने जा रहा था।

यूरोप से निकला माता का यह विचार कैसे भारत माता बना? इसपर हम आगे चर्चा करेंगे।....(क्रमशः)

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