डेरों के गुलाम

धर्म के नाम पर लोगों को मानसिकरूप से गुलाम बनाया जा सकता है। उनके मताधिकार पर कब्जा किया जा सकता है। कोई मालिक की तरह एक फरमान जारी करेगा और सभी गुलाम उसी दल को वोट करेंगे। देश में अब भी ऐसा होता है।

इन मानसिक गुलामों के हिस्से में लोकतंत्र आया ही नहीं। इन्होंने आजादी को धर्म के नाम पर गिरवी रख दिया।  ये भगत सिंह जैसे हजारों शहीदों की कुर्बानी को लज्जित करते हैं।

वोट का अधिकार हर वयस्क नागरिक का राष्ट्र के प्रति कर्तव्य है। उसकी गोपनीयता का महत्व है। उसे किसी ऐसे लंपट के चरणों में रखना पाप है, जो आपके वोटों के दम पर सरकारों से सौदेबाजी करे।

जागिए और अपने वोट का फैसला खुद कीजिए। इसी में देश का हित है।

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