राणा सांगा की गलती दोहराते राजनाथ

Sudhir Raghav
मोदी दूसरे इब्राहिम लोदी साबित हो रहे हैं। देश में 1525 जैसी आर्थिक अराजकता है। पार्टी के लिए यह नेता बदलने का सही वक्त है।
अब देखना है कि क्या राजनाथ भी वही गलती करेंगे जो राणा सांगा ने की थी। इतिहासकारों के अनुसार राणा चाहते तो 1525 में लोदी को आसानी से उतारकर सत्ता अपने हाथ में ले सकते थे। मगर उन्होंने कूटनीति का रास्ता चुना और बाबर को मौका मिल गया। बाबर चालाक निकला और यहीं जम गया।
राणा की यह कूटनीति भारतीय इतिहास में उनकी सबसे बङी गलती के रूप में दर्ज है। बाद में खानवा का युद्ध ने इसे साबित कर दिया। 1525-26 में सवा लाख की सबसे शक्तिशाली सेना राणा के पास थी। वह लोदी को आसानी से बेदखल कर सकते थे और ऐसा करते तो बाबर अपने 30 हजार लङाकों के साथ दिल्ली की तरफ आंख उठाने की हिम्मत नहीं कर सकता था।
अब देखना है कि राजनाथ और भाजपा चुनाव का इंतजार करते हैं या खुद फैसला करते हैं। अगर चुनाव का इंतजार किया तो चुनाव तो फैसला करेगा ही मगर भाजपा के लिए वह राणा जैसी ही गलती होगी।
भाजपा चाहे तो वह मोदी को बदलकर खुद को जनता की नजर में मजबूत कर सकती है।

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