नेता की नफरत

हिटलर यहुदियों से नफरत करता था और उन्हें खत्म करने के लिए उसने गैस चैंबर बनवाए।
इसे गरीबों से नफरत है, उन्हें खत्म करने के लिए इसने नोट बदलवाए।
रुपये न बदले जाने पर एक दिन में तीन गरीबों ने आत्महत्याएं की हैं और तानाशाह कहता है कि बेइमान परेशान हैं।
अगर निशाना सेठ लोग होते तो नोट बंदी महीने की पहली तारीख को की होती, क्योंकि इसी तारीख को सेठों के पास सबसे ज्यादा कैश होता है। आठ तारीख तक तो सेठ लोग इस धन का बडा हिस्सा अपने कामवालों, नौकरों और मजदूरों को वेतन के रूप में बांट चुके होते हैं।
नोट बंदी के एलान के लिए आठ तारीख इसलिए चुनी क्योंकि यह वह तिथि है, जब कैश मजदूरों और श्रमिकों के पास होता है, उन्हें नकद में वेतन मिल चुका होता है। नवंबर इसलिए चुना क्योंकि धान की फसल बेचने के बाद इस महीने काफी नकदी किसानों के पास भी होती है।
इन दोनों वर्गों को ही तानाशाह ने अपनी नफरत का निशाना बनाया है।

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