डिजिटल इंडिया में लट्ठ गाढ़ता हरियाणा

देश में डिजिटल नारों की गूंज है, मगर सिस्टम मैनुअली भी नहीं चल पा रहा। हालत यह है कि सड़क हादसे में घायलों के लिए एंबुलेंस मंगाना भी आसान नहीं है।
दो साल पहले तक बहुत से मामलों में नंबर वन होने का दवा करने वाले हरियाणा में अब हालत यह है कि एक जज को भी कह दिया कि एंबुलेंस उङकर नहीं आएगी।
मामला दो दिन पहले का है। पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत के जज जगदीप लोहान जींद के पास अपने गांव से चंडीगढ़ लौट रहे थे। इक्कस के पास एक हादसे को देख उन्होंने अपनी गाङी रुकवाई और घायलों की मदद को नीचे उतरे। उन्होंने 102 पर एंबुलेंस को कॉल किया मगर एंबुलेंस नहीं आई। काफी देर इंतजार के बाद दोबारा काल किया तो जवाब मिला एंबुलेंस उड़कर नहीं आएगी। एंबुलेंस के न आने पर जज साहब ने एक कैंटर को रुकवाकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
जज साहब ने जो किया वह हर व्यक्ति के लिए अनुकरणीय है। मगर उस अॉपरेटर का जवाब देश को सोचने को मजबूर करता है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री उङकर जा सकते हैं मगर देश में एंबुलेंस उङकर नहीं जा सकती। हाइवे पर तङपते व्यक्ति की जान की कीमत कुछ नहीं हैं।
सारा मामला हरिराणा के स्वास्थ्य मंत्री की जानकारी में है। उनका कहना है कि मामले की जांच के आदेश स्वास्थ्य विभाग को दे दिए गए हैं।

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