सुनो बनारस

सुधीर राघव
अपनी अपनी खाट यहां पर
अपने अपने ठाठ
नेता कब से देख रहे थे
इस चुनाव की बाट
गैया गोबर खाट खरहरी
मंदिर होगा मुद्दा
जाति धर्म या हाथी साइकिल
मुस्काएगा बुद्धा
घर घर ढूंढे गंगा मैया
फर फर झूठा नेता
भूल बनारस दिल्ली बैठा
वोटर क्या कर लेता
हाथ का मैल नहीं है वोटर
जिसने उसे भुलाया
उस पार्टी की दुर्गति ऐसी
कैसा हुआ सफाया
कमल खिलेगा इसी आस में
कीचड़ जो फैलाता
पब्लिक अगर जान ले ये सब
खाता नहीं खुल पाता
झूम झूमकर चलने वाला
खुद को समझे हाथी
गाय के गोबर के आगे मगर
दाल नहीं गल पाती
कच्ची पक्की सड़क पर पंक्चर
ये साइकिल की सत्ता
कब यहां खाट खड़ी हो जाए
नहीं पता ये चलता
अपने अपने को देय रेबड़ी
जब जब बांटे अंधा
मत इनको जन सेवक समझो
इनका मोटा धंधा
कहत सुधीर सुनो बनारस
कुर्ते पर मत जाना
जीत गए तो सूट पहनकर
इन्हें मनीला जाना।।

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