ऐसे दिन भी आने थे

सुधीर राघव
पाकिस्तान को सबक सिखाने की बात हम नहीं करेंगे। हम बात करेंगे उनकी जिन्हें सबक सिखाने में मोदी सरकार तन मन और धन से लगी है। भाजपा और संघ के वालिंटियर जिस काम में तन से लगे हैं। सरकार धन से और मोदी जी मन से। आज हम उसकी बात करते हैं।
सुबह सुबह डंडा लेकर गरीबों को जंगलों से भगाया जाता है। ये वे लोग हैं, जिनके पास घर नहीं हैं। चंडीगढ़ की सड़कों पर पलते हैं और रात को फुटपाथों पर सोते हैं। रिक्शा चलाते हैं या भीख मांगकर गुजारा करते हैं।
जाहिर है कि जब इनके पास घर नहीं हैं तो शौचालय भी नहीं होंगे। शहर के सार्वजनिक शौचालयों पर ताले टंगे हैं। जो कंपनी इन्हें चलाती थी, वह इन पर विज्ञापन लगवा देती थी। उस पर विज्ञापन घोटाले का आरोप लगाकर हटा दिया गया। यथा राजा तथा अफसर। अफसरों ने बौद्धिक विकास का परिचय देते हुए इन शौचालयों पर ताले लगवा दिए।
गरीब और बेघर बेशौचालय लोग सुबह सुबह जंगल की ओर निकल जाते थे। अब उन्हें वहां डंडा लेकर खङे भक्त मिल जाते हैं। गोभक्तों वाली स्पेशल ट्रेनिंग वाले ये भक्त इन बेशौचालय लोगों से क्या सलूक करते हैं, इसका कोई वीडियो तो अभी तक नहीं आया, इसलिए हम मान लेते हैं कि वे इन गरीब लोगों को प्यार से समझाते होंगे और बेचारे गरीब मान जाते होंगे। या फिर कोई ऐसा योग सिखाते होंगे कि वे नेचरकाल की समस्या से सदैव के लिए मुक्ति पा लें।
वैसे चंडीगढ़ में खुले में शौच पर 500 रुपये जुर्माना भी है। मगर इन गरीबों की जेब में पांच रुपये भी निकल आएं तो बड़ी बात है। ऐसे में अफसरों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि जुर्माना कैसे वसूलें। इस चिंता से उन्हें रातभर नींद नहीं आती। जुर्माना न वसूला तो टार्गेट पूरे न होंगे। टार्गेट पूरा न हुआ तो स्वच्छता का अवार्ड कैसे मिलेगा?
अब ऐसे नजारे आम हो सकते हैं। आप सुबह सुबह सैर पर निकले हैं। पार्क के गेट पर ही कोई मैला कुचैला सा पेट पकड़े गिड़गिड़ा रहा है- साहब पांच रुपये दे दो। शौचालय जाना है।बहुत पुण्य होगा।
आप ट्रेकसूट की जेबों पर हाथ मारते हैं। उसमें पर्स नहीं है। सिर्फ गाड़ी की चावी है। आपको दिनभर अफसोस होगा कि सुबह सुबह पुण्य के काम से वंचित रह गए।
मगर यह स्थित तब आएगी जब शहर के शौचालयों के ताले खुलेंगे। अभी आपको सुबह सुबह पुण्य कमाना है तो डंडा लेकर जंगल जाइए। गरीबों को बैठने से भगाइए। इससे मोदी जी के मन को सकून मिलेगा। आज की तारीख में मोदी के मन सकून देने से बड़ा पुण्य का काम कोई दूसरा नहीं।

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