बेरोजगारी में कच्छा, काम गोरक्षा

सुधीर राघव
यह है देश में युवाशक्ति के विकास की तस्वीर
* वर्ष 2012 ओलंपिक में देश ने 06 मेडल जीते और ओलंपिक 2016 में सिर्फ दो जीत सके। यानी तीन सौ फीसदी की अभूतपूर्व गिरावट।
* युवाओं को रोजगार देने में तो तीन सौ फीसदी की ज्यादा गिरावट आई है। वर्ष 2014 में 4 लाख 93 हजार युवाओं को रोजगार मिला था मगर 2015 में यह संख्या घटकर सिर्फ 1 लाख 35 हजार ही रह गई। ( लेबर ब्यूरो के अनुसार)
नतीजा देश के निर्यात में लगातार जबरदस्त गिरावट। इस साल जुलाई में ही 6.84 फीसदी दर्ज की गई। इस दबाव में रुपया दो साल में डालर के मुकाबले करीब नौ रुपये से ज्यादा कमजोर हुआ।
कारण
लोगों की टैक्स से जमा राजस्व का बङा हिस्सा नमामी गंगे, योगा और सवच्छता अभियानों पर उङाया गया। इन योजनाओं के तहत कोई उत्पादक काम नहीं हुआ। बस विज्ञापनबाजी हुई और सारा पैसा चुनिंदा लोगों को ही गया। युवाओं के विकास, रिसर्च फंड और खेल के फंड तक रोके और काटे गए।
इन बेरोजगार युवाओं को भी लगता है कि कच्छा पहनो, लाठी उठाओ और चांदी कूटो। वे नहीं जानते कि यह कच्छा और लाठी उन्हें विनाश के मार्ग पर ले जा रहे हैं। युवा शक्ति को भ्रमित कर देश को बर्बाद कर रहे हैं।

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