दीपावली की शुभकामनाएं

सुधीर राघव

एक बाती के दम पर
अंधेरे से
रात भर लड़ा ‌च‌िराग।

उम्मीद उस लौ की तरह है
‌ज‌िसे कम से कम
एक द‌िए और बाती के
साथ की जरूरत होती है।

इस तरह दीपावली
देती है
भाईचारे के संदेश।

‌द‌िवाली शुभ है
क्यों‌क‌ि च‌िराग की
रोशनी है सबके ल‌िए।

द‌िवाली शुभ है
क्योंक‌ि तुमने
सबकी बात की
और सब तुम्हारी बात करते हैं।

‌द‌िवाली शुभ है
क्योंक‌ि स्नेह के घी
और
मक्खन लगाने में
फर्क होता है।

खील बताशों
और खाल‌िस मीठे के साथ
आप सबको दीपावली की शुभकामनाएं।


Comments

रविकर said…
पाव पाव दीपावली, शुभकामना अनेक |
वली-वलीमुख अवध में, सबके प्रभु तो एक |
सब के प्रभु तो एक, उन्हीं का चलता सिक्का |
कई पावली किन्तु, स्वयं को कहते इक्का |
जाओ उनसे चेत, बनो मत मूर्ख गावदी |
रविकर दिया सँदेश, मिठाई पाव पाव दी ||


वली-वलीमुख = राम जी / हनुमान जी
पावली=चवन्नी
गावदी = मूर्ख / अबोध
Virendra said…
आपको भी दीपावली की शुभकामनाएं। कविता अच्छी लगी।

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