संघ के स‌िपाही

संघ अपने अनुशासन के ‌ल‌िए जाना जाता है। उसकी नीत‌ियां और एजेंडा तय है। इसके बावजूद संघ से देश की राजनीत‌ि में आने वाले नेता कद बड़ा होते ही ‌‌खुद को दुव‌िधा में पाते हैं। आडवाणी जी इसका उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री पद की दौड़ में खुद को धर्म न‌िरपेक्ष सा‌ब‌ित करने की को‌‌शिश में वह ज‌िन्ना की मजार पर माथा टेकते नजर आए। मोदी कमोवेश उनके पदच‌िन्हों पर चल रहे हैं। शौचालयों पर उनका बयान और शोभन सरकार के सपने पर ‌ट‌िप्पणी, ‌‌हिदुत्व से अलग चेहरा बनाने का प्रयास भर है।

पर सबक संघ के पथ संचालन में छुपा है। पथ संचालन से पहले सबकी तैयारी परखी जाती है। संघ के न‌िक्कर में इतनी गुंजाईश रखी जाती है ‌कि ‌बिगड़ी हुई कमीज को खींच कर सुधारा जा सके। यह तस्वीर भी यही बताती है। जो नेता इसे भूलता है उसके ल‌िए अडवाणी जी एक उदाहरण हो सकते हैं।  

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